एफआरके आपूर्ति ठप, सीएमआर नहीं उठने से धान खरीद संकट में, अध्यक्षों ने डीएम से लगायी गुहार

जिले के समितियां दो करोड़ 25 लाख रुपये ब्याज का कर रही है वहन

– जिले के समितियां दो करोड़ 25 लाख रुपये ब्याज का कर रही है वहन सुपौल. जिले में धान खरीद योजना गंभीर संकट में है. एफआरके की आपूर्ति नहीं होने के कारण चावल का उठाव शुरू नहीं हो सका है. जिससे जिले के पैक्स एवं व्यापार मंडल समितियों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ रहा है. इस संबंध में जिले के सभी पैक्स एवं व्यापार मंडल अध्यक्षों ने जिला पदाधिकारी को एक संयुक्त आवेदन देकर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया है. आवेदन में बताया गया है कि जिले में अब तक 15,124 किसानों से कुल 9,10,06,094 क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है. जिसकी कुल कीमत लगभग 220 करोड़ रुपये आंकी गई है. इस राशि पर समितियों को प्रतिमाह करीब 2 करोड़ 25 लाख रुपये ब्याज का भार वहन करना पड़ रहा है. अध्यक्षों ने बताया कि गत वर्ष 14 दिसंबर से सीएमआर जमा होने के बावजूद अगस्त–सितंबर तक सीएमआर का उठाव किया गया. जबकि भुगतान अक्टूबर–नवंबर में हुआ. इस विलंब के कारण समितियों को प्रति क्विंटल सीएमआर पर लगभग 125 रुपये ब्याज चुकाना पड़ा. जबकि राज्य खाद्य निगम द्वारा केवल 11 रुपये प्रति क्विंटल की राशि मात्र दो माह के लिए ही सूद के रूप में दी जाती है. परिणामस्वरूप ढुलाई, रखरखाव एवं अन्य मदों की पूरी राशि ब्याज में ही समाहित हो जाती है. सीएमआर देर से उठने के कारण धान का लंबे समय तक भंडारण करना पड़ता है. जिससे भंडारण क्षति अत्यधिक बढ़ जाती है. इस क्षति की भरपाई समिति अध्यक्षों को निजी स्तर पर करनी पड़ती है. जिससे समितियां लगातार घाटे में जा रही है. गत वर्ष कई समितियों के खाते डेबिट में चले गए थे.। वर्तमान वर्ष में किसी तरह खातों को संतुलित कर पुनः धान खरीद प्रारंभ की गई है. अध्यक्षों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही सीएमआर उठाव शुरू नहीं हुआ, तो जिले की लगभग सभी समितियां डूब जाएंगी. अध्यक्ष एवं प्रबंधकों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. साथ ही समाज में उन पर घोटालेबाज और भ्रष्टाचारी होने का कलंक भी लग सकता है. आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इससे नव स्थापित जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड सुपौल पर भी संकट आ सकता है. जिसके प्रशासक स्वयं जिला पदाधिकारी हैं. इस बैंक की स्थापना के लिए जिले के अध्यक्षों ने लगभग 15 वर्षों तक सहकारिता विभाग, वित्त मंत्रालय, केन्द्रीय वित्त मंत्रालय एवं रिजर्व बैंक के चक्कर लगाए थे. सुपौल के स्थानीय विधायक एवं बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री के अथक प्रयास से ही यह बैंक अस्तित्व में आ सका है. जिले के सभी पैक्स एवं व्यापार मंडल अध्यक्षों ने जिला पदाधिकारी से मांग की है कि जब पूरे बिहार में एफआरके की आपूर्ति हो रही है, तो सुपौल जिले में भी अविलंब एफआरके की आपूर्ति सुनिश्चित कर सीएमआर उठाव शुरू कराया जाए. साथ ही अतिरिक्त ब्याज भार से समितियों को मुक्त करने एवं भंडारण क्षति का आकलन कर उसकी भरपाई हेतु सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया जाए. ताकि समितियों और बैंक को डूबने से बचाया जा सके. इस संबंध में संयुक्त निबंधक, सहयोग समितियां कोशी प्रमंडल सहरसा, निबंधक सहयोग समितियां बिहार पटना एवं सचिव, सहकारिता विभाग बिहार को भी प्रतिलिपि भेजी गई है. आवेदन देने वालों में पैक्स अध्यक्ष प्रदीप कुमार, तरूण प्रताप, नरेंद्र प्रसाद सिंह, एवं नरेश कुमार मिश्र शामिल हैं.

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