कुछ दिन पहले लगाये गये बोर्डों की परतें उखड़ी, छपाई में गलती

लोगों ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद वेलकम गेट किसी सस्ते निजी निर्माण जैसा प्रतीत होता है

– विकास के नाम पर लूट, 25 लाख के साइनेज बोर्ड व 79 लाख के वेलकम गेट की गुणवत्ता पर उठे रहे सवाल

प्रभात पड़ताल

राघोपुर. नगर पंचायत सिमराही में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की खुली बर्बादी का आरोप लगने लगा है. यहां करीब 25 लाख रुपये की लागत से लगाए गए साइनेज बोर्ड और लगभग 79 लाख रुपये की लागत से बने वेलकम गेट की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है. बोर्ड लगाए जाने के महज कुछ ही दिनों के भीतर उसकी हालत खराब होने लगी है, जिससे पूरे कार्य पर सवाल खड़े हो गए हैं.

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि 17 वार्डों में करीब 100 साइनेज बोर्ड लगाए गए हैं, जिन पर लगभग 25 लाख 50 हजार रुपये खर्च किए गए. सूत्रों के अनुसार प्रति बोर्ड की कीमत करीब 25,500 रुपये है. इसके बावजूद कई बोर्डों की रैपर व प्लास्टिक परत उखड़ने लगी है. कहीं किनारे फट गए हैं तो कहीं छपाई में गलत शब्द तक पाए गए हैं. लोगों का सवाल है कि यदि 25 हजार रुपये से अधिक कीमत वाला बोर्ड कुछ ही दिनों में खराब हो जाए, तो इसे गुणवत्ता कैसे कहा जा सकता है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि बोर्ड में बेहद घटिया और कमजोर सामग्री का उपयोग किया गया है. उनका कहना है कि अगर शुरुआत में ही यह स्थिति है, तो बारिश और तेज धूप में ये बोर्ड ज्यादा दिन टिक नहीं पाएंगे. लोगों का साफ कहना है कि 25 लाख रुपये की राशि में कहीं बेहतर और टिकाऊ बोर्ड लगाए जा सकते थे, लेकिन यहां ऐसा प्रतीत होता है कि योजना जनता की सुविधा के बजाय किसी की जेब भरने के लिए कराई गई है. इसे सरकारी धन के दुरुपयोग और कमीशनखोरी से जोड़कर देखा जा रहा है. कार्रवाई की मांगसामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि यदि टेंडर जेम पोर्टल के माध्यम से हुआ है, तो पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए. टेंडर किस एजेंसी को दिया गया, कौन सा ब्रांड और कौन सी सामग्री उपयोग की गई, तकनीकी स्वीकृति किसने दी और गुणवत्ता जांच रिपोर्ट क्या है इन सभी बिंदुओं को सार्वजनिक किया जाना चाहिए. उन्होंने जिलाधिकारी एवं विभागीय अधिकारियों से उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. सिर्फ साइनेज बोर्ड ही नहीं, बल्कि नगर पंचायत क्षेत्र में लगभग 79 लाख रुपये की लागत से बनाए गए वेलकम गेट की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तरह साइनेज बोर्ड की स्थिति सामने आई है, उससे वेलकम गेट में भी घटिया सामग्री के इस्तेमाल की आशंका गहराती जा रही है. लोगों ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद वेलकम गेट किसी सस्ते निजी निर्माण जैसा प्रतीत होता है. वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगाए गए वेलकम बोर्ड के पोल की ऊंचाई और संरचना में भी असमानता दिखाई दे रही है. नगर पंचायत सिमराही की कार्यशैली पर पहले भी आरोप लगते रहे हैं. अब इन नई शिकायतों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है. लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर सिर्फ बोर्ड और गेट लगाकर वाहवाही लूटी जा रही है, जबकि जमीनी हकीकत में न गुणवत्ता है और न ही पारदर्शिता का ख्याल रखा गया.

करायी जायेगी जांच : ईओ इस पूरे मामले पर नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी वीणा वैशाली ने बताया कि उन्हें भी कई स्थानों से शिकायतें मिली है. जल्द ही इसकी जांच कराई जाएगी. स्थानीय जनता अब जांच के साथ ठोस कार्रवाई की मांग कर रही है.

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By RAJEEV KUMAR JHA

RAJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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