Kranti CLF Raghopur: ग्रामीण महिलाओं की मेहनत और सामूहिक प्रयास से चल रही आजीविका गतिविधियों ने अब आर्थिक मजबूती की तस्वीर दिखानी शुरू कर दी है. धरहरा की क्रांति जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड (क्रांति सीएलएफ) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 15 लाख 37 हजार 872 रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है.
मंगलवार को समिति के कार्यालय परिसर में आयोजित वार्षिक आमसभा में जब पिछले वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा सदस्यों के सामने रखा गया, तो आय और खर्च के आंकड़ों के साथ महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों की प्रगति भी सामने आयी. अब समिति ने अगले वित्तीय वर्ष में अपनी गतिविधियों को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी की है. वर्ष 2026-27 के लिए 19 करोड़ 85 लाख 64 हजार 126 रुपये की अनुमानित कार्ययोजना पेश की गयी.
77.90 लाख की आय, 62.52 लाख रुपये खर्च
वार्षिक आमसभा में समिति की सचिव कविता देवी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि इस अवधि में समिति को कुल 77,90,790 रुपये की आय हुई.
विभिन्न मदों में समिति की ओर से 62,52,918 रुपये खर्च किए गए. आय और खर्च के बाद समिति ने 15,37,872 रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया.
आमसभा में सदस्यों के सामने लेखापरीक्षित वित्तीय विवरण भी रखा गया. इस पर सदस्यों ने चर्चा की और समिति की आर्थिक गतिविधियों की समीक्षा की.
करीब 350 जीविका दीदियों ने लिया हिस्सा
वार्षिक आमसभा में जीविका कर्मियों, विभिन्न कैडर के सदस्यों के साथ करीब 350 जीविका दीदियां शामिल हुईं. कार्यक्रम की अध्यक्षता क्रांति सीएलएफ की अध्यक्ष खुशबू देवी ने की.
कार्यक्रम का उद्घाटन बीडीओ सतेंद्र कुमार, प्रखंड परियोजना प्रबंधक जीविका संतोष कुमार वर्मा, क्षेत्रीय समन्वयक रम्भा कुमारी, सामुदायिक समन्वयक निभा कुमारी और सीएलएफ अध्यक्ष खुशबू देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया.
बैठक में समिति की उपलब्धियों, आर्थिक गतिविधियों और आगामी योजनाओं की जानकारी महिलाओं के साथ साझा की गयी.
अगले साल 19.85 करोड़ रुपये की योजना
सिर्फ मुनाफे तक सीमित रहने के बजाय समिति अब अपनी गतिविधियों का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 19,85,64,126 रुपये का अनुमानित बजट पेश किया गया.
समिति का लक्ष्य अधिक से अधिक जीविका दीदियों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना और उनकी आमदनी बढ़ाना है. इसके लिए आजीविका और व्यवसायिक गतिविधियों के विस्तार पर जोर दिया जाएगा.
बैठक में प्रस्तावित कार्ययोजना पर सदस्यों से सुझाव भी लिए गए. खेती, पशुपालन, छोटे उद्यम और अन्य आयवर्धक गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई.
बचत से उद्यमिता तक, महिलाओं के लिए बढ़ रहे अवसर
क्रांति सीएलएफ से जुड़ी महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बचत और बैंक लिंकेज की सुविधा मिल रही है. इसके साथ ही ऋण सुविधा के जरिए कृषि, पशुपालन और छोटे व्यवसाय शुरू करने के अवसर भी बढ़ रहे हैं.
समिति की ओर से महिलाओं के कौशल और क्षमता विकास पर भी जोर दिया जा रहा है. उद्देश्य यह है कि महिलाएं केवल समूह की सदस्य बनकर न रहें, बल्कि अपनी आमदनी बढ़ाने वाली गतिविधियों से सीधे जुड़ें.
आमसभा में कई जीविका दीदियों ने समिति से जुड़ने के बाद के अपने अनुभव भी साझा किए. पदाधिकारियों के अनुसार सामूहिक प्रयासों से महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है.
बीडीओ बोले, महिलाओं को अवसर मिले तो बदल सकता है परिवार
बीडीओ सतेंद्र कुमार ने कहा कि जीविका बिहार में महिला सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम बन चुकी है. ग्रामीण महिलाओं को अवसर और उचित मंच मिलने पर वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं.
उन्होंने कहा कि इस अभियान का लाभ जिले के हर जरूरतमंद परिवार तक पहुंचाने की जरूरत है. महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के साथ स्वास्थ्य, पोषण और बच्चों की शिक्षा जैसे मुद्दों पर भी गंभीरता से काम किया जाना चाहिए.
आमसभा में तय हुई अगले साल की दिशा
प्रखंड परियोजना प्रबंधक जीविका संतोष कुमार वर्मा ने कहा कि वार्षिक आमसभा पूरे वर्ष के काम की समीक्षा और आने वाले वर्ष की रणनीति तय करने का महत्वपूर्ण मंच है.
उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बचत, बैंक लिंकेज और ऋण सुविधा के साथ खेती, पशुपालन और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है. इन प्रयासों से जीविका दीदियों की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ रही है.
उन्होंने महिलाओं से समूहों की गतिविधियों को और मजबूत करने तथा उपलब्ध योजनाओं और अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की.
Kranti CLF Raghopur: अब चुनौती मुनाफे के साथ ज्यादा महिलाओं तक पहुंचने की
क्रांति सीएलएफ के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी आर्थिक गतिविधियों को अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाने की है. 2026-27 के लिए करीब 19.85 करोड़ रुपये की कार्ययोजना इस विस्तार की बड़ी तस्वीर पेश करती है.
अगर प्रस्तावित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ और ज्यादा महिलाएं खेती, पशुपालन व छोटे उद्यमों से जुड़ीं, तो आने वाले समय में ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में समिति की भूमिका और मजबूत हो सकती है.
वार्षिक आमसभा में रखे गए आंकड़े फिलहाल यही संकेत देते हैं कि सामूहिक बचत और आजीविका गतिविधियों के जरिए ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह लगातार मजबूत हो रही है.
