कोसी नदी का भीषण कटाव सुपौल के किशनपुर प्रखंड क्षेत्र के दुबियाही पंचायत स्थित बेला गोठ के ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. करीब चार माह पहले कोसी नदी के कटाव में गांव का प्राथमिक विद्यालय पूरी तरह नदी की धारा में विलीन हो गया. विद्यालय भवन के नष्ट होने के बाद अब सबसे बड़ी चिंता बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को लेकर है.
ग्रामीणों का कहना है कि कोसी की तेज धारा ने गांव में कई परिवारों के घर और जमीन को प्रभावित किया है, लेकिन बच्चों से शिक्षा का अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए. विद्यालय भवन के नदी में समा जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. ऐसे में स्कूल भवन का जल्द पुनर्निर्माण जरूरी है.
सरकारी जमीन पर स्कूल बनाने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने स्पष्ट मांग रखी है कि विद्यालय का निर्माण किसी निजी जमीन पर कराने के बजाय बेला गोठ टोले के बीच उपलब्ध सरकारी जमीन पर कराया जाए. ग्रामीणों के अनुसार टोले के बीच स्कूल बनने से आसपास रहने वाले अधिक से अधिक बच्चे आसानी से विद्यालय पहुंच सकेंगे.
उनका कहना है कि यदि स्कूल गांव से दूर बनाया गया तो छोटे बच्चों के लिए वहां पहुंचना मुश्किल होगा. इसलिए विद्यालय के लिए ऐसी जगह का चयन किया जाए, जो पूरे टोले के बच्चों के लिए सुविधाजनक हो.
डीएम को सौंपा सामूहिक आवेदन
विद्यालय भवन के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से हस्ताक्षरित आवेदन जिलाधिकारी सावन कुमार को सौंपा है. आवेदन के साथ सरकारी जमीन से संबंधित साक्ष्य के रूप में खतियान भी संलग्न किया गया है.
ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थल निरीक्षण कराने और उपलब्ध सरकारी जमीन में विद्यालय निर्माण के लिए उपयुक्त स्थल को जल्द चिह्नित करने की मांग की है. साथ ही विद्यालय भवन के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने की अपील की गयी है.
बच्चों की पढ़ाई बचाने की चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के नहीं रहने से सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ रहा है. कोसी के कटाव ने भले ही विद्यालय भवन को अपने आगोश में ले लिया, लेकिन बच्चों की शिक्षा रुकनी नहीं चाहिए.
मणिकांत झा, महेंद्र चौधरी, गुलाब देवी, गणेश मिश्रा, प्रेम देवी सहित कई ग्रामीणों ने आवेदन पर हस्ताक्षर कर विद्यालय के पुनर्निर्माण की मांग का समर्थन किया है.
प्रशासन से उम्मीद, जल्द मिलेगी स्कूल की नई जमीन
ग्रामीणों ने कहा कि कोसी की धारा में विद्यालय भवन जरूर विलीन हो गया, लेकिन बच्चों की आंखों में शिक्षा और बेहतर भविष्य का सपना अब भी जिंदा है. उनका कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते सरकारी जमीन चिह्नित कर विद्यालय निर्माण की पहल करता है तो बच्चों की पढ़ाई दोबारा पटरी पर लौट सकती है.
ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिलाधिकारी के स्तर से मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थल निरीक्षण और विद्यालय निर्माण की दिशा में जल्द ठोस कदम उठाया जाएगा.