Health Crisis : किशनपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में चिकित्सकों की कमी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है. करीब ढाई लाख से अधिक आबादी वाले इस क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पिछले सात वर्षों से केवल दो एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोसे चल रही है. डॉक्टरों की कमी का सीधा असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है और लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है.
हर दिन सैकड़ों मरीज पहुंच रहे अस्पताल
30 बेड वाले इस अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 250 से 300 मरीज ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचते हैं. इसके अलावा 60 से अधिक मरीज इमरजेंसी सेवाओं का लाभ लेते हैं, जबकि प्रतिदिन औसतन पांच से दस प्रसव भी कराए जाते हैं. मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के बावजूद पर्याप्त चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं होने से अस्पताल पर कार्यभार बढ़ता जा रहा है.
आयुष डॉक्टरों के सहारे संभाली जा रही व्यवस्था
चिकित्सकों की कमी के कारण अस्पताल प्रशासन को आयुष चिकित्सकों की सेवाएं लेनी पड़ रही हैं. आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थापित डॉक्टरों को भी बुलाकर व्यवस्था संभाली जाती है. बावजूद इसके मरीजों को विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है.
10 पद स्वीकृत, एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं
सीएचसी प्रभारी डॉ. अखिलेश कुमार ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 10 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल दो एमबीबीएस डॉक्टर कार्यरत हैं. अस्पताल में एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं है. उन्होंने बताया कि उनके अलावा डॉ. अभिषेक कुमार सिन्हा भी यहां पदस्थापित हैं, लेकिन 14 जुलाई से अवकाश पर हैं. ऐसे में अस्पताल की अधिकांश जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है.
गंभीर मरीजों को करना पड़ता है रेफर
विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपलब्धता के कारण गंभीर मरीजों को सदर अस्पताल अथवा अन्य बड़े चिकित्सा संस्थानों में रेफर करना पड़ता है. इससे मरीजों और उनके परिजनों को अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ती है.
अतिरिक्त डॉक्टरों की मांग, मरीजों ने भी उठाई आवाज
अस्पताल प्रशासन ने चिकित्सकों की कमी को लेकर सिविल सर्जन को पत्र भेजकर अतिरिक्त डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति की मांग की है. वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द चिकित्सकों की नियुक्ति कर स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए, ताकि ग्रामीण मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े.
