इलाके में हुई ओलावृष्टि से किसानों की कमर टूटी , 50 से 200 ग्राम तक के गिरे ओले

इस तरह की ओलावृष्टि कई वर्षों बाद देखने को मिली है

राघोपुर. प्रखंड क्षेत्र में शनिवार की देर संध्या अचानक मौसम ने करवट ले ली, जिससे पूरे इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया. तेज आंधी के साथ शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने कुछ ही देर में विकराल रूप धारण कर लिया. इसके साथ हुई भीषण ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया. वहीं, रविवार की सुबह एक बार फिर मौसम ने अपना रूप दिखाना शुरू कर दिया. कुछ देर तक आसमान में अंधेरा छाने के बाद पुनः मूसलाधार बारिश के साथ ओलावृष्टि शुरू हो गई. हालांकि शनिवार संध्या की अपेक्षा रविवार को हुई ओलावृष्टि के दौरान ओला का साइज काफी छोटा रहने की वजह से कुछ खास नुकसान नहीं हुआ. स्थानीय लोगों के अनुसार, इस तरह की ओलावृष्टि कई वर्षों बाद देखने को मिली है. लोगों ने बताया कि शनिवार संध्या हुई ओलावृष्टि के दौरान ओले असामान्य रूप से बड़े थे. जिनका वजन लगभग 50 ग्राम से लेकर 200 ग्राम तक आंका जा रहा है. इतने बड़े ओलों के गिरने से घरों की छतों, टिन-शेड, खिड़कियों और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा है. वहीं सड़कों पर कुछ समय के लिए आवागमन भी बाधित हो गया. अचानक आई प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है. रबी सीजन की फसलें, जो कटाई के लिए लगभग तैयार थी. ओलावृष्टि और तेज बारिश के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है. गेहूं, चना और मसूर जैसी फसलें खेतों में ही गिरकर खराब हो गई. इसके अलावा बागवानी फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. आम और लीची के पेड़ों पर लगे बौर और फल झड़ गए. जिससे आने वाले समय में उत्पादन पर असर पड़ना तय माना जा रहा है. वहीं मूंग, मक्का और पाट की फसल भी इस आपदा से अछूती नहीं रही और बड़े पैमाने पर क्षति की खबरें सामने आ रही है. इस घटना के बाद किसान काफी चिंतित और हताश नजर आ रहे हैं. स्थानीय प्रशासन से प्रभावित किसानों ने जल्द से जल्द फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है. लोगों का कहना है कि अगर समय रहते राहत नहीं मिली, तो किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराना तय है. इसके अलावा न्यू मार्केट स्थित डॉ राजेन्द्र पब्लिक स्कूल के घर एस्बेस्टस का छत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है. साथ ही किसानों के पाट का फसल अधिक प्रभावित हुआ. इस संबंध में आरओ आकांक्षा कुमारी ने बताया कि फिलहाल कहीं से क्षति की सूचना नहीं दी गई है, सूचना मिलने के बाद आवश्यक कार्यवाही की जाएगी. वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र राघोपुर के वरीय वैज्ञानिक डॉ मिथिलेश कुमार राय ने बताया कि शनिवार और रविवार को हुई भारी ओलावृष्टि के कारण आम और लीची के फलों को काफी नुकसान हुआ है. तेज हवा के साथ पत्थर गिरने के कारण पौधे गिरने व पत्तियों के नुकसान से रबी फसल के साथ साथ गरमा मक्का के फसल में 30 प्रतिशत से अधिक के नुकसान का अंदाजा लगाया जा रहा है. वहीं मखाना के पत्तों के फटने से उत्पादन 30 से 80 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है. उन्होंने बताया कि आम और लीची के फसल को बचाने के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल, 0.3 प्रतिशत 3 मिली प्रति लीटर व साफ का 2 ग्राम व एनपीके का 0:0:50 के अनुपात में छिड़काव करने से नुकसान से बचा जा सकता है.

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