आस्था : हिन्दू-मुस्लिम एकता की बनी मिसाल, दोनों समुदाय के लोग विसर्जन के समय मूर्ति को कंधे पर उठाकर करते है परिक्रमा

विसर्जन के समय वे मूर्ति को कंधे पर उठाकर परिक्रमा में शामिल होते हैं

– – 1932 में मंदिर की हुई स्थापना वीरपुर बसंतपुर प्रखंड के बलभद्रपुर पंचायत स्थित ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर में नवरात्र के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. मंदिर कमेटी के उपाध्यक्ष रमेश कुमार मेहता ने बताया कि यह मंदिर वर्ष 1932 से स्थापित है और तब से यहां लगातार दुर्गा पूजा होती आ रही है. नेपाल सहित सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया, कटिहार और भागलपुर जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण करने हेतु यहां आते हैं. उनका मानना है कि इस मंदिर में मांगी गई मन्नतें अवश्य पूरी होती हैं. कमेटी के सचिव संदीप पौद्दार ने बताया कि माता की विशेष कृपा से निःसंतान दंपत्ति को संतान प्राप्ति होती है. यही कारण है कि इस मंदिर को लेकर भक्तों की आस्था और भी गहरी है. हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक पंचायत प्रतिनिधि मो तौहीद और पैक्स अध्यक्ष शौकत ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग भी सक्रिय रूप से मंदिर की तैयारियों और कार्यों में सहयोग करते हैं. यहां तक कि विसर्जन के समय वे मूर्ति को कंधे पर उठाकर परिक्रमा में शामिल होते हैं. वर्षों से गंगा-जमुनी तहज़ीब पर आधारित इस परंपरा ने बलभद्रपुर पंचायत को सामाजिक समरसता की मिसाल बनाया है. इस अवसर पर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष महेंद्र गोठिया, कोषाध्यक्ष राकेश यादव, वरिष्ठ सदस्य दिनेश बारियेत, लाल बाबू मेहता, हरिश्चंद्र स्वर्णकार, देवेंद्र जायसवाल, लड्डू चौधरी, विनोद चौवाल, लखन दास, राज किशोर चौधरी, सूर्य नारायण मेहता, चंद्र किशोर यादव, विनोद मेहता, संतोष गोठिया, घनश्याम चौधरी, पिंकू चौधरी समेत अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे.

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