सदर अस्पताल की व्यवस्था आईसीयू में, मरीजों की जान से हो रहा खिलवाड़

अपने कार्य के प्रति संवेदनशील नहीं दिखते चिकित्सक

– चिकित्सक के बदले पारा मेडिकल, एएनएम व जीएनएम के छात्र करते हैं इलाज – अपने कार्य के प्रति संवेदनशील नहीं दिखते चिकित्सक फोटो- 12 कैप्सन – डॉक्टर के बदले इलाज करते पारा मेडिकल के छात्र सुपौल. सरकारी दावों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि सदर अस्पताल सुपौल में स्वास्थ्य व्यवस्था बद से बदतर हो चुकी है. आपातकालीन कक्ष का संचालन डॉक्टरों के बजाय पारा मेडिकल, एएनएम और जीएनएम की पढ़ाई कर रहे छात्रों के भरोसे हो रहा है. इससे न केवल मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है, बल्कि आए दिन परिजनों द्वारा हंगामा और विरोध-प्रदर्शन भी देखने को मिल रहा है. मंगलवार को सुबह 08 बजे से दोपहर 02 बजे तक इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी डॉक्टर बीएन भारती की थी, लेकिन मौके पर मरीजों का इलाज छात्रों द्वारा किया जा रहा था. मरीजों को दवाएं लिखने से लेकर प्राथमिक उपचार तक का काम बिना विशेषज्ञ देखरेख के किया जा रहा था. जब परिजनों ने इसका विरोध किया और हंगामा हुआ, तब डॉक्टर भारती आरामगृह से बाहर निकले और उल्टे परिजनों पर ही नाराज हो गए. उनका कहना था कि छात्रों द्वारा इलाज उनके निर्देश पर ही किया जा रहा है. इस तरह की लापरवाही कोई नई बात नहीं है. अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी तो है ही, जो मौजूद हैं, वे भी अपनी जिम्मेदारी से कतराते नजर आते हैं. ड्यूटी से नदारद रहने की प्रवृत्ति और मरीजों के प्रति उदासीनता अब आम हो गई है. इसका सीधा असर मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ रहा है, जो बेहतर इलाज की आस में सरकारी अस्पताल आते हैं लेकिन मजबूरी में प्राइवेट डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है. स्थानीय लोगों ने बताया कि इस तरह की समस्याओं की शिकायत कई बार सिविल सर्जन से दूरभाष के माध्यम से की जा चुकी है, लेकिन हालात जस की तस है. सवाल उठता है कि अगर स्वास्थ्य विभाग अब भी नहीं जागा तो आमजन का विश्वास सरकारी अस्पतालों से पूरी तरह उठ जाएगा. अस्पताल परिसर में मंडराते रहते हैं बिचौलिया सदर अस्पताल में गांव देहात से आये मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी नर्सिंग होम ले जाने के लिए दर्जनों बिचौलिया अस्पताल परिसर में घूमते रहते हैं. ऐसा नहीं की अस्पताल प्रबंधक को इसकी खबर नहीं रहती, लेकिन इसपर कार्रवाई करने के बजाय चुप रहना ही मुनासिब समझते हैं. जानकार बताते हैं कि किसी वरीय अधिकारी के आने की सूचना पर ही इन दलालों को परिसर से भगा दिया जाता है. ताकि वरीय अधिकारी को सच्चाई का पता न लग जाये. जांच कर होगी कार्रवाई : सीएस इस बाबत सिविल सर्जन डॉ ललन कुमार ठाकुर ने बताया कि पारा मेडिकल, एएनएम एवं जीएनएम के छात्र डॉक्टर की मदद के लिए दिया जाता है. ये लोग किसी भी मरीज का इलाज नहीं कर सकते हैं. यदि ऐसा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी.

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By RAJEEV KUMAR JHA

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