राजस्व कर्मचारियों की मांगें अनसुनी, चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा

जिला मुख्यालय स्थित डिग्री कॉलेज चौक के समीप एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन

– राजस्व कर्मचारियों के हित से जुड़े मुद्दों को लगातार किया जा रहा है नजर अंदाज : जिलाध्यक्ष – जिला मुख्यालय स्थित डिग्री कॉलेज चौक के समीप एक दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन सुपौल. बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ (महासंघ गोपगुट) की जिला शाखा सुपौल ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर विभाग और प्रशासन के प्रति नाराजगी जाहिर की है. संघ के सदस्यों ने गुरुवार को जिला मुख्यालय स्थित डिग्री कॉलेज चौक के समीप एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया. संघ के जिलाध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि विगत आठ माह से लगातार मांगें उठाने, ज्ञापन सौंपने और विभागीय स्तर पर आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. इससे आक्रोशित होकर संघ ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा कर दी है, जिसकी औपचारिक सूचना जिला पदाधिकारी को दी गई है. कहा कि राजस्व कर्मचारियों की समस्याएं वर्षो से लंबित हैं. कई बार विभागीय पदाधिकारियों, तत्कालीन मंत्री और अपर मुख्य सचिव स्तर तक मांगें पहुंचाई गयी. यहां तक कि तत्कालीन अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के हस्ताक्षर से मांगों को पूरा करने के लिए पत्र भी जारी हुआ था, लेकिन आठ माह बीत जाने के बाद भी विभाग ने इस दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं की. इससे यह संदेश जा रहा है कि राजस्व कर्मचारियों के प्रति विभाग का रवैया उदासीन बना हुआ है. कहा कि अन्य विभागों की तुलना में राजस्व विभाग के निचले स्तर के कर्मचारी हमेशा उपेक्षा के शिकार रहे हैं. वरीय अधिकारियों और उच्च पदों से जुड़ी मांगें तो तत्काल पूरी कर दी जाती हैं, लेकिन राजस्व कर्मचारियों के हित से जुड़े मुद्दों को लगातार नजर अंदाज किया जा रहा है. 11 फरवरी तक मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सभी राजस्व कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरना करने को होंगे विवश : सचिव संघ के जिला सचिव विकास कुमार पाठक ने कहा कि संघ ने अपनी प्रमुख मांगों को फिर से दोहराया है. इनमें राजस्व कर्मचारियों के ग्रेड पे को 1900 (लेवल-2) से बढ़ाकर 2800 (लेवल-5) किए जाने की मांग प्रमुख है. कहा कि जब अब न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक कर दी गई है, तो ग्रेड पे 4200 होना चाहिए. इसके अलावा सभी नवनियुक्त राजस्व कर्मचारियों को गृह जिला में पदस्थापन, राजस्व कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन जैसे लैपटॉप, डोंगल और समय पर मासिक रिचार्ज की व्यवस्था, क्षेत्र भ्रमण के लिए ईंधन सहित मोटरसाइकिल उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है. कहा कि एक राजस्व कर्मचारी को एक ही हल्का या पंचायत का प्रभार दिया जाए, ताकि काम का दबाव संतुलित रहे. वर्तमान में एक-एक कर्मचारी को कई हल्कों का जिम्मा सौंपा गया है, जिससे कार्य क्षमता प्रभावित हो रही है. कहा कि कर्मचारियों के द्वारा दिन-रात काम करने के बावजूद वरीय पदाधिकारियों द्वारा स्पष्टीकरण और निलंबन जैसी कार्रवाई की जाती है, जिससे मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न की स्थिति बन रही है. कहा कि कार्य अवधि को लेकर भी कर्मचारियों में नाराजगी है. कार्य समय सुबह 10 बजे से शाम 05 बजे तक सुनिश्चित किया जाए. कहा कि महाअभियान और आपदा जैसी स्थिति का हवाला देकर कर्मचारियों से सुबह 07 से 08 बजे से रात 08 से 09 बजे तक काम लिया जा रहा है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है. इसके साथ ही रविवार और अन्य राजपत्रित अवकाश में काम लेने पर रोक लगाने, लंबित क्षतिपूर्ति अवकाश और भत्ते के भुगतान की मांग भी रखी गई है. कहा कि इन सभी मुद्दों को लेकर संघ ने आंदोलन की रूपरेखा तय कर ली है. 03 फरवरी को पूरे बिहार में काला बिल्ला लगाकर कार्य किया गया. 05 फरवरी को जिला मुख्यालय पर एक दिवसीय धरना दिया गया है. वहीं 09 फरवरी को पटना के गर्दनीबाग में राज्यस्तरीय धरना प्रस्तावित है. कहा कि यदि 11 फरवरी तक मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सभी राजस्व कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने को विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग और राज्य सरकार की होगी. इस अवसर पर राकेश रौशन, मुकेश कुमार, दीपक कुमार पासवान, अरविंद बैठा, गुंजन कुमार, नजीब आलम, सोनू कुमार मंडल, प्रभात कुमार, मनीष कुमार, दिलीप कुमार, अवध बिहारी, धनंजय कुमार, गौतम कुमार, आनंद कुमार गुप्ता, पवन कुमार सहित दर्जनों कर्मचारी मौजूद थे.

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