– महंगाई और लागत की बोझ के बीच जंगली जानवरों का कहर – किसानों ने कहा, शिकायत के बावजूद नहीं हो रहा समाधान सुपौल. सदर प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों नीलगायों के आतंक से किसानों को भारी परेशानी हो रही है. नीलगाय की झुंड लगातार खेतों में घुसकर तैयार फसलों को बर्बाद कर रहा है. जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. खेती पहले से ही महंगाई, बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता के कारण चुनौतीपूर्ण बनी हुई थी. लेकिन अब नील गाय का खतरा किसानों की परेशानी को और बढ़ा रहा है. ग्रामीण किसानों का कहना है कि खेती करना अब पहले जैसा आसान नहीं रहा. एक ओर बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर फसल तैयार होने के बाद जंगली जानवर उसे नष्ट कर दे रहे है. इससे किसानों की मेहनत और निवेश दोनों पर पानी फिर रहा है. झुंड में रहती है नील गाय बताया कि नील गाय दर्जनों की संख्या में झुंड बनाकर रात के समय खेतों में धावा बोलती है. यह जानवर गेहूं, मक्का, सरसों, दलहन और सब्जियों की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे है. किसानों ने बताया कि कई बार पूरी फसल रातों-रात बर्बाद हो जाती है. जिससे उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है. नील गाय का आतंक इतना बढ़ गया है कि दिन के समय भी ये खेतों में दिखाई देने लगे है. कई बार किसानों द्वारा भगाने की कोशिश करने पर भी ये आसानी से नहीं भागते. इससे किसानों में भय और चिंता का माहौल बना हुआ है. बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को शिकायत की गई है. लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया. खेती करना और भी मुश्किल हो जाएगा. जानकारों का कहना है कि नील गाय की संख्या में लगातार वृद्धि और जंगलों के क्षेत्र में कमी के कारण यह जानवर अब ग्रामीण इलाकों की ओर अधिक आ रहे हैं. इसका सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ रहा है.
नीलगायों के आतंक से फसल बर्बाद, किसान परेशान
महंगाई और लागत की बोझ के बीच जंगली जानवरों का कहर
