सुपौल में 2025 की सबसे सर्द सुबह, जनजीवन अस्त-व्यस्त

बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए बढ़ा जोखिम

-बुजुर्ग एवं बच्चों के स्वास्थ्य पर बढ़ा खतरा फोटो – 01, 16 कैप्सन – अलाव के पास बैठे लोग, आग के पास गर्माहट पाने की कोशिश करता पालतू कुत्ता सुपौल. जिले में वर्ष 2025 की अब तक की सबसे अधिक ठंड शनिवार को दर्ज की गई. जिससे आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया. ठंड और शीतलहर के चलते पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहा. लोगों को सूर्यदेव के दर्शन नहीं हो सके. सुबह से ही घना कोहरा छाया रहा. जबकि तेज सर्द पछुआ हवाओं ने ठिठुरन को और बढ़ा दिया. हालात ऐसे रहे कि लोग अनावश्यक रूप से घरों से बाहर निकलने से बचते नजर आए. शनिवार की सुबह जिले के कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम रही. हाईवे और मुख्य सड़कों पर वाहनों की रफ्तार सामान्य से काफी कम देखी गई. जिससे यातायात प्रभावित रहा. ठंड से कांपता जनजीवन भीषण ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर देखा गया. सुबह होते ही लोग अलाव का सहारा लेते नजर आए. ग्रामीण इलाकों में चौक-चौराहों, बस स्टैंड और बाजार क्षेत्रों में आग जलाकर लोग खुद को ठंड से बचाते दिखे. वहीं शहरी क्षेत्रों में लोग गर्म कपड़ों में पूरी तरह लिपटे नजर आए. दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों और छोटे दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ गई. मजदूर देर से काम पर पहुंचे, जबकि कई दुकानदारों ने अपनी दुकानें भी देर से खोली. ठंड के कारण बाजारों में ग्राहकों की संख्या कम रही, जिससे कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ा. स्कूल-कॉलेजों में घट रही उपस्थिति कड़ाके की ठंड का असर शैक्षणिक संस्थानों पर भी साफ नजर आया. जिले के कई स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति कम रही. अभिभावकों ने छोटे बच्चों को ठंड से बचाने के लिए घर पर ही रखा. खासकर प्राथमिक कक्षाओं में बच्चों की संख्या काफी कम देखी गई. स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा ठंड बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य समस्याएं भी तेजी से सामने आ रही है. सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार, दमा और सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है. सदर अस्पताल सहित निजी क्लिनिकों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ हरिशंकर ने बताया कि इस तरह की कड़ाके की ठंड में नवजात और छोटे बच्चों को विशेष सावधानी की जरूरत होती है. ठंड के मौसम में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे वे जल्दी बीमार पड़ सकते हैं. उन्होंने अभिभावकों को बच्चों को गर्म कपड़े पहनाने, ठंडी हवा से बचाने और गुनगुना पानी पिलाने की सलाह दी. साथ ही कहा कि सर्दी, खांसी, बुखार या सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें. इस मौसम में निमोनिया और ब्रोंकाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए बढ़ा जोखिम विशेषज्ञों के अनुसार, कड़ाके की ठंड बुजुर्गों और हृदय रोग, मधुमेह तथा सांस की बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. ठंड के कारण रक्तचाप बढ़ने, दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा रहता है. बुजुर्गों को सुबह-सुबह ठंड में बाहर निकलने से बचने और नियमित दवाइयों का सेवन जारी रखने की सलाह दी गई है. मौसम विभाग की चेतावनी मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत से आ रही शीतलहर और पछुआ हवाओं के कारण जिले में ठंड का प्रकोप बढ़ा है. अगले 3 से 4 दिनों तक तापमान में खास सुधार की संभावना नहीं है. सुबह और रात के समय ठंड और बढ़ सकती है, साथ ही कोहरा छाए रहने से यातायात प्रभावित होने की आशंका बनी रहेगी. मौसम वैज्ञानिक डॉ देबन कुमार चौधरी ने बताया कि शनिवार को जिले का अधिकतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. हवा की रफ्तार 07 से 08 किलोमीटर प्रति घंटे रही. प्रशासन की तैयारी और अपील ठंड को देखते हुए जिला प्रशासन भी सतर्क नजर आ रहा है. नगर परिषद और पंचायत स्तर पर अलाव की व्यवस्था की जा रही है. सार्वजनिक स्थलों, बस स्टैंड और प्रमुख चौक-चौराहों पर अलाव जलाने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन ने लोगों से ठंड से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है. साथ ही खुले में रहने वाले गरीब और बेसहारा लोगों की मदद करने का आग्रह किया गया है. सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं से कंबल वितरण जैसे कार्यों में सहयोग की अपील की गई है.

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