वीरपुर में एनीमिया मुक्त बिहार अभियान शुरू, 64% किशोर-किशोरियों और महिलाओं में खून की कमी का दावा

बिहार में एनीमिया के खिलाफ एक विशेष अभियान शुरू किया गया है, जिसका लक्ष्य 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक किशोर-किशोरियों और कम हीमोग्लोबिन वाली माताओं की पहचान कर उनका उपचार करना है. राज्य में 64% किशोर, किशोरियों और महिलाओं में खून की कमी एक चिंताजनक स्थिति है.

Anemia Free Bihar Campaign: वीरपुर में शरीर में खून की कमी को अक्सर लोग कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही समस्या लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य परेशानी का कारण बन सकती है. इसी को देखते हुए बिहार में एनीमिया के खिलाफ विशेष अभियान शुरू किया गया है. मंगलवार को वीरपुर स्थित अनुमंडल अस्पताल के सभागार में एनीमिया मुक्त बिहार अभियान की शुरुआत हुई.

25 अगस्त 2026 से 30 नवंबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान के दौरान किशोर-किशोरियों और कम हीमोग्लोबिन वाली माताओं की पहचान कर उनके उपचार पर जोर दिया जाएगा. स्वास्थ्य संस्थानों से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों तक जरूरी दवाएं और स्वास्थ्य संबंधी सलाह उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है.

अभियान की शुरुआत के मौके पर अनुमंडल अस्पताल में करीब 50 किशोरियां भी मौजूद रहीं. कार्यक्रम के दौरान उन्हें एनीमिया से बचाव, जांच और उपचार से जुड़ी जरूरी जानकारी दी गयी.

आखिर क्यों जरूरी है एनीमिया से लड़ाई?

एनीमिया यानी शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी. इसके कारण थकान, कमजोरी और रोजमर्रा के काम में परेशानी महसूस हो सकती है. किशोरियों और महिलाओं के लिए यह समस्या विशेष चिंता का विषय मानी जाती है.

अभियान के तहत कम हीमोग्लोबिन वाले किशोर-किशोरियों और माताओं की पहचान कर उन्हें जरूरत के अनुसार उपचार और दवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है.

स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि जांच और उपचार की सुविधा लोगों को उनके नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से मिल सके.

25 अगस्त से 30 नवंबर तक चलेगा अभियान

एनीमिया मुक्त बिहार अभियान 25 अगस्त 2026 से 30 नवंबर 2026 तक चलेगा. इस अवधि में किशोर-किशोरियों और महिलाओं में एनीमिया की समस्या को कम करने के लिए निर्धारित उपायों को लागू किया जाएगा.

कार्यक्रम में अधिकारियों ने संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को अभियान के दौरान जरूरी गतिविधियों को सुनिश्चित करने की जानकारी दी.

इसका उद्देश्य केवल दवा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समय पर जांच कर एनीमिया से पीड़ित लोगों की पहचान करना और उन्हें उपचार उपलब्ध कराना भी है.

अस्पताल से आंगनबाड़ी केंद्र तक मिलेगी सुविधा

अभियान के तहत स्वास्थ्य संस्थानों से लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों तक आवश्यक दवाएं और सलाह उपलब्ध कराने की बात कही गयी है.

इससे उन किशोरियों और महिलाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है, जो नियमित रूप से अस्पताल नहीं पहुंच पाती हैं. स्वास्थ्यकर्मी लोगों को एनीमिया के लक्षण, जांच और उपचार के बारे में भी जानकारी देंगे.

कार्यक्रम के दौरान किशोरियों को भी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी दी गयी, ताकि वे शरीर में खून की कमी को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर समय पर जांच करा सकें.

अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में FCM उपलब्ध

अस्पताल प्रबंधक अविनाश कुमार ने बताया कि बिहार में अभी भी कुल 64 प्रतिशत किशोर, किशोरियों और महिलाओं में खून की कमी है.

उन्होंने कहा कि समय पर जांच कराने और सरकार की ओर से उपलब्ध करायी जा रही दवाओं का सेवन करने से एनीमिया को नियंत्रित किया जा सकता है.

अस्पताल प्रबंधक ने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में FCM उपलब्ध है. उनके अनुसार, गर्भवती माताओं से लेकर अन्य माताओं के उपचार में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े राज्य के अधिकारी

अभियान की शुरुआत के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और विभिन्न विभागों के सचिव जुड़े.

इसके अलावा बिहार के सभी 38 जिलों के सदर अस्पताल और अनुमंडल अस्पताल के उपाधीक्षक एवं प्रबंधक भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए.

अधिकारियों ने निर्धारित अवधि के दौरान किशोरियों और महिलाओं में एनीमिया की कमी को दूर करने के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित करने पर जोर दिया.

Anemia Free Bihar Campaign: वीरपुर में 50 किशोरियों की मौजूदगी

वीरपुर अनुमंडल अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ममता कुमारी, अस्पताल प्रबंधक अविनाश कुमार, लेखा प्रबंधक सुशील कुमार सुमन, ब्लॉक एम एंड ई रवि कुमार चौधरी और करीब 50 किशोरियां मौजूद रहीं.

अभियान की शुरुआत के साथ अब स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती यह है कि एनीमिया से प्रभावित किशोरियों और महिलाओं की समय पर पहचान हो और उन्हें अभियान की अवधि में नियमित रूप से उपचार और जरूरी सलाह मिल सके.

अगर जांच और दवा की सुविधा लोगों तक प्रभावी तरीके से पहुंचती है, तो अभियान के दौरान एनीमिया की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है.

Also Read: बिहार में दो दिन महिलाओं के लिए बस सेवा फ्री, CM सम्राट ने 4700 स्कूटी-बाइक भी किया रवाना, जानें और क्या मिला तोहफा

Also Read: नेपाल में तबाही के बाद बिहार में गंडक का अलर्ट, NDRF- SDRF तैयार; इन जिलों पर खास नजर


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By प्रमोद कुमार

प्रमोद कुमार प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अपराध, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं. वीरपुर (सुपौल) क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >