Aaj Ka Darshan : भगवान वरदराज पेरुमल देवस्थानम विष्णु मंदिर को लोग अब “उत्तर बिहार का दक्षिण भारतीय विष्णुधाम” कहने लगे हैं. तमिलनाडु के प्रसिद्ध मंदिरों की तर्ज पर निर्मित यह विशाल मंदिर न केवल वैष्णव सम्प्रदाय बल्कि पूरे धार्मिक जगत के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है. बिहार समेत नेपाल और आसपास के कई राज्यों से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
14 एकड़ में फैला भव्य विष्णुधाम
करीब 14 एकड़ क्षेत्र में फैला यह मंदिर दक्षिण भारत की प्रसिद्ध चोल स्थापत्य शैली पर आधारित है. मंदिर की ऊंची संरचना, आकर्षक नक्काशी और विशाल परिसर श्रद्धालुओं को पहली नजर में ही आकर्षित कर लेता है.
इस मंदिर का निर्माण स्वर्गीय डॉ. जयनारायण मल्लिक की अर्जित संपत्ति से उनके परिवारजनों द्वारा कराया गया. मंदिर निर्माण के लिए एक न्यास बनाया गया, जिसके प्रथम अध्यक्ष प्रसिद्ध शल्य चिकित्सक स्वर्गीय डॉ. पवन कुमार मल्लिक बने. मंदिर निर्माण और इसके संचालन में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही.
11 वर्षों में तैयार हुआ भव्य मंदिर
जानकारी के अनुसार वर्ष 2004 में डॉ. पीके मल्लिक ने मंदिर की नींव रखी थी. इसके बाद 2009 में भव्य निर्माण कार्य शुरू हुआ. लगभग 11 वर्षों की मेहनत के बाद वर्ष 2014 में मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की गयी और इसे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया.
दक्षिण भारत के कांचीपुरम स्थित प्रसिद्ध विष्णु मंदिर की तर्ज पर बने इस देवस्थानम को अब “विष्णुधाम” के नाम से भी पहचान मिली है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर ने राघोपुर और गणपतगंज जैसे छोटे इलाके को राष्ट्रीय धार्मिक मानचित्र पर नई पहचान दिलायी है.
आस्था के साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र
कोसी क्षेत्र की बाढ़ और संघर्ष के बीच यह मंदिर अब आध्यात्मिक शांति का बड़ा केंद्र बन चुका है. सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, दरभंगा और मधुबनी समेत कई जिलों से लोग यहां दर्शन करने पहुंचते हैं.
मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार मंदिर प्रतिदिन सुबह 7 बजे से दोपहर 11:40 बजे तक और फिर दोपहर 3:30 बजे से शाम 7 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है.
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