सुपौल से विकास कुमार की रिपोर्ट:
सुपौल: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार संध्या शहर स्थित होटल आर. के. पैलेस के सभागार में प्रबुद्ध जन संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया. कार्यक्रम में जिलेभर से करीब 150 प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया. संगोष्ठी में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक उत्थान जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई.
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य वक्ता धर्मेंद्र जी (सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख, आरएसएस उत्तर बिहार प्रांत), संगोष्ठी के अध्यक्ष मेजर डॉ. एस. बी. प्रसाद, जिला कार्यवाह लालू प्रसाद लाल, स्वयंसेवक नागेंद्र नारायण ठाकुर और शालीग्राम पाण्डेय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. कार्यक्रम का संचालन सह जिला कार्यवाह रंजन कुमार ने किया.
अध्यक्षीय संबोधन में मेजर डॉ. एस. बी. प्रसाद ने ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि सामाजिक प्रगति के लिए नागरिकों को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है. उन्होंने सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने पर बल दिया.
मुख्य वक्ता धर्मेंद्र जी ने अपने विस्तृत उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा, राष्ट्र निर्माण में समाज की भूमिका और वर्तमान चुनौतियों पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि भारतीय समाज ने ऐतिहासिक रूप से अनेक चुनौतियों का सामना किया है, फिर भी वह अपनी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों के साथ विश्व को शांति और मानवता का संदेश देता रहा है.
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा का आधार धर्म है, जिसने समाज को कठिन परिस्थितियों में भी संगठित रखा है. वर्तमान समय में सामाजिक एकता को कमजोर करने के प्रयासों से सतर्क रहने की आवश्यकता है.
धर्मेंद्र जी ने कहा कि संघ व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज की सज्जन शक्ति को संगठित कर रहा है. समाज में समरसता, स्वदेशी, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य जैसे विषयों पर जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है.
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित प्रबुद्धजनों ने राष्ट्र निर्माण और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संकल्प लिया।
