जिले के बैंक और एटीएम से रुपये निकालनेवाले ग्राहक कोढ़ा गिरोह के अपराधियों के निशाने पर हैं. जिले में बीते 48 घंटे में तीन अलग-अलग घटनाओं में 76 हजार रुपये की लूट हुई है.
सुपौल : नोटबंदी के दौर से गुजर रहे आम लोगों के लिए दोहरी त्रासदी झेलने की स्थिति है. जिले के बैंकों और एटीएम पर कोढ़ा गिरोह के बाइकर्स की पैनी नजर है और बैंक और एटीएम से रुपये निकालने वाले ग्राहक कोढ़ा गिरोह के अपराधियों के निशाने पर हैं. जिले में बीते 48 घंटे में तीन अलग-अलग घटनाओं में जो 76 हजार रुपये की लूट हुई है, उसमें कोढ़ा गिरोह की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है. जिले के पुलिस अधिकारी गिरोह की पहचान के दावे कर रहे हैं. लेकिन कोढ़ा गैंग के बाबत कुछ भी बोलने से पहरेज कर रहे हैं. पुलिस सीसीटीवी फुटेज को खंगालने में जुटी है. लिहाजा उम्मीद की जा सकती है कि शीघ्र ही लूट गिरोह के सदस्य पुलिस के शिकंजे में होंगे. लेकिन कोढ़ा गैंग गिरोह की कार्यशैली से स्पष्ट है कि पुलिस की राह बहुत आसान नहीं होगी.
बैंक से निकले ग्राहकों को बनाते रहे हैं सॉफ्ट टारगेट: गिरोह के सदस्य मुख्यत: बैंकों के ग्राहकों को अपना निशाना बनाता है. गिरोह के सदस्य अमूमन बैंक की रेकी करते हैं. बैंक से रुपया निकालने तक से लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचने के दौरान वे अपना शिकार बनाते हैं. गिरोह के सदस्य मुख्यत: झपट्टा मार कर रुपये का थैला छीन लेते हैं. इसके अलावा बाइक की डिक्की में रखे रुपये को डिक्की तोड़ कर उड़ा लेना इनके बांये हाथ का खेल होता है. इसके अलावा बैंक से निकले ग्राहकों के शरीर पर मैला लगाना या नोंचने वाली दवाई छिड़क कर रुपये का थैला उड़ा लेना इनकी कार्यप्रणाली का हिस्सा है.
बिहार, बंगाल और यूपी में सक्रिय है गैंग
कटिहार जिला में एनएच 31 के किनारे कोढ़ा एक प्रखंड मुख्यालय है. यहां एक जुराबगंज नाम का मुहल्ला है. जहां जरायम पेशा से जुड़े हुए लोग बड़ी संख्या में निवास करते हैं. यहां अधिकांश आबादी नट समुदाय की है. हालांकि इनमें से एक बड़ी आबादी अब अपराध को छोड़ कर सामाजिक मुख्य धारा से जुड़ चुकी है. लेकिन आज भी यहां युवाओं की एक बड़ी फौज ने अपराध जगत से अपना रिश्ता जोड़ रखा है. यहां बाल अपराधी से लेकर युवा तक अपराध से जुड़े हुए हैं. यहां के अपराधी पड़ोसी पश्चिम बंगाल से लेकर उत्तर प्रदेश तक सक्रिय हैं.
स्टाइलिस बाइक है इनका पसंदीदा वाहन
कोढ़ा गिरोह के सदस्य बाइक के जरिये अपराध को अंजाम देते हैं. इनका पसंदीदा स्टाइलिस बाइक है. गिरोह के अधिकांश सदस्य काले रंग की बाइक का प्रयोग करते हैं. अपराध की ट्रेनिंग के दौरान इन्हें सबसे पहले तेज बाइक चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है. हाई स्पीड बाइक का ही इस्तेमाल करते हैं जो काफी तेजी से रफ्तार पकड़ता है. यही वजह है कि इस गिरोह के सदस्य अपराध की घटना को अंजाम देने के बाद शायद ही कभी पकड़ में आता है. जाहिर है उसके बाद पुलिस की स्थिति सांप भागने के बाद लकीर पीटने वाली होती है. खास बात यह है कि इस गिरोह के अपराधी शायद ही हथियार का उपयोग करते हैं
बैंक ग्राहकों को लूटने के अलावा बाइक की चोरी भी इस गिरोह का दूसरा मुख्य पेशा है. जिले में पूर्व में भी कोढ़ा गिरोह के सदस्य अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं. लिहाजा इस बार पुलिस गिरोह के सदस्य को गिरफ्तार कर पाती है या नहीं, भविष्य के गर्भ में छिपा है. लेकिन घटना से जाहिर है कि कोढ़ा गिरोह का सदस्य जिले में दस्तक दे चुका है.
इस दिशा में पुलिस गंभीर है. गिरोह की पहचान कर ली गयी है. शीघ्र ही लुटेरों की गिरफ्तारी कर ली जायेगी.
डाॅ कुमार एकले, पुलिस अधीक्षक, सुपौल
