मुसीबत. घने कोहरे की चपेट में रहा पूरा दिन, रजाई में दुबके रहे लोग
सुबह से चल रही सर्द हवाओं व कुहासे के कारण लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया. हालांकि दोपहर को सूर्यदेव के दर्शन तो हुए लेकिन पछुआ हवा के कारण धूप से कोई फर्क ही नहीं पड़ा. लगातार शीतलहर के कारण दैनिक मजदूरों व गरीबों को काम नहीं मिल रहा.
सुपौल : बीते एक सप्ताह से अचानक मौसम का मिजाज बदलते ही तापमान में काफी गिरावट आ गयी है. एक सप्ताह से सूर्य के दर्शन तो होते हैं, लेकिन शीतलहर के कारण धूप का पता भी नहीं चलता है. रविवार को भी पूरा शहर सुबह 11 बजे तक घने कोहरे की चपेट में रहा. सुबह से चल रही सर्द हवाओं व कुहासा के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया.
हालांकि दोपहर को सूर्य देव के दर्शन होने से स्थित सामान्य रही. लेकिन पछुआ हवा के कारण धूप से कोई फर्क ही नहीं पड़ता है. लगातार शीतलहर के कारण दैनिक मजदूरों व गरीबों के पेट पर आफत हो गयी है. सुबह से मौसम खराब रहने के कारण इस ठंड में इन्हें काम नहीं मिल पा रहा है. काम की तलाश में चौक-चौराहों पर निकलते तो हैं लेकिन बैठ कर वापस चले जाते हैं. सुबह से ही चल रही पछुआ हवा व घने कुहासा के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल रहा. घने कोहरे के कारण व सर्द हवा के चलते अधिकांश लोग रजाई में ही दुबके रहे. घरों में लोगों ने रूम हीटर व आग का सहारा लिया. पछुआ हवा के चलते रहने से हाड़ कंपा देने वाली ठंड से सड़कों पर आवाजाही कम दिखी.
बच्चों को परेशानी
बहरहाल, ठंड के कारण आम जनजीवन ठहर सा गया है. जिले के लोगों के दिन की शुरूआत पूर्वाहन 10 बजे के बाद शुरू होती है. सर्द हवा के कारण सूर्य देव की गरमी हवा हो जाती है.
सबसे खराब स्थिति स्कूली बच्चों व रिक्शा चालकों की है. बच्चों को इस भीषण ठंड में स्कूल जाना मजबूरी बनी हुई है. वहीं ठंड ने मजूदर वर्ग के रोजगार पर मानो जैसे लात ही मार दी है.
खुले हैं स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र
हाड़ कांपने वाली ठंड के बावजूद सरकारी व निजी स्कूल की कौन कहे, आंगनबाड़ी केंद्र भी खुले हुये हैं. घने कुहासा की बीच स्कूल जाने के लिए अभिभावकों को बच्चों को तैयार कर स्कूल पहुंचाना पड़ता है. जिससे बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों की भी परेशानी बढ़ गयी है. स्कूल बंद नहीं रहने से ठंड लगने के कारण बच्चें बीमार पड़ सकते हैं. हालांकि जिला प्रशासन द्वारा पिछले दिनों वर्ग 01 से 05 तक के बच्चों को छुट्टी दी गयी थी. लेकिन सबसे परेशानी आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों को होती है. जिसे अपना नाम तक पता नहीं रहता है उसे इस ठंड में भी स्कूल जाना पड़ता है.
