अनदेखी. माइनेज सिस्टम और दबंगई के आगे सरकार का आदेश पड़ा बौना
सदर प्रखंड की बसबिट्टी पंचायत में शिक्षा विभाग व आम लोगों की आंखों में धूल झोंक कर विगत चार वर्षों से एक शिक्षक जबरन मध्य विद्यालय बसबिट्टी के प्रधानाध्यापक की कुरसी पर कब्जा जमाये बैठे हैं. विद्यालय के प्रधानाध्यापक की हैसियत से प्रति माह लाखों रुपये की निकासी भी कर रहे हैं.
सुपौल : जिले के शिक्षा विभाग में कार्यों का निष्पादन नियम व वरीय पदाधिकारियों के आदेश से नहीं बल्कि माइनेज सिस्टम और दबंगई के तहत किया जाता है. शिक्षक व विभागीय कर्मी मिल कर वरीय पदाधिकारी व आम लोगों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि विभागीय अधिकारी को इस बात की भनक भी नहीं लगती. अथवा निजी स्वार्थ की पूर्ति के एवज में अधिकारी आंख बंद किये हुए हैं. यही वजह है कि जिन शिक्षकों को प्रधानाध्यापक की कुरसी पर होना चाहिए उन्हें अपने कनीय शिक्षक के आदेश का पालन करने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है.
ऐसा ही एक मामला सदर प्रखंड के बसबिट्टी पंचायत में सामने आया है. जहां विभाग व आम लोगों की आंखों में धूल झोंक कर विगत चार वर्षों से एक शिक्षक जबरन मध्य विद्यालय बसबिट्टी के प्रधानाध्यापक की कुरसी पर कब्जा जमाये बैठे हैं और विद्यालय के प्रधानाध्यापक की हैसियत से प्रति माह लाखों रुपये की निकासी कर रहे हैं. जबकि विगत दो वर्ष पूर्व ही जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा विद्यालय के वरीय स्नातक शिक्षक श्रीराम चौधरी को विद्यालय का प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाते हुए इनके हस्ताक्षर का नमूना बैंक को भेजने का आदेश प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को दिया गया था.
लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बावजूद डीइओ के आदेश का अनुपालन बीइओ द्वारा नहीं किया गया. सबसे मजेदार पहलू यह है कि इस विद्यालय को बिहार सरकार द्वारा उच्च माध्यमिक विद्यालय में उत्क्रमित कर दिया गया है. विद्यालय में वर्ग नौ एवं दशम में 403 छात्र-छात्रा नामांकित हैं. वहीं इस विद्यालय में दो शिक्षक भी नियुक्त किये गये हैं. लेकिन मध्य विद्यालय बसबिट्टी के जबरन प्रधानाध्यापक बने प्रमोद कुमार सिंह ही इस उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधान पद पर भी जबरन काबिज हैं. जबकि श्री सिंह को विभाग का कोई आदेश प्राप्त नहीं है.
वर्ग नौ व दस में कुल 403 छात्र-छात्रा हैं नामांकित : सरकार ने मध्य विद्यालय बसबिट्टी को उत्क्रमित करते हुए उच्च माध्यमिक (+2) विद्यालय का दर्जा दिया है. वर्ग नौ एवं दस में कुल 403 छात्र-छात्रा नामांकित हैं तथा इन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति भी की गयी है. लेकिन विडंबना यह है
कि बिना किसी विभागीय आदेश के मैट्रिक प्रशिक्षित शिक्षक प्रमोद कुमार सिंह स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों के प्रधान बने हुए हैं और उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य की हैसियत से उच्च माध्यमिक विद्यालय के वित्तीय कार्य का संपादन करते हुए लाखों रुपये की निकासी कर रहे हैं. जानकारी अनुसार जबरन प्रधानाध्यापक के पद पर कब्जा जमाये बैठे श्री सिंह द्वारा तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद प्रबंध समिति की एक भी बैठक आयोजित नहीं की गयी है.
प्रधान बने शिक्षक और शिक्षक बने प्रधान : बिहार सरकार द्वारा स्पष्ट आदेश जारी किया गया है कि यदि किसी विद्यालय में स्थायी प्रधानाध्यापक पदस्थापित नहीं हैं तो उस विद्यालय के वरीयतम शिक्षक को ही प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाया जाय. लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सरकार के इस आदेश को ताक पर रख कर माइनेज सिस्टम और मनमानी के तहत कनीय शिक्षक को प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर बनाये हुए हैं. विभागीय अधिकारियों की इस कार्यशैली की वजह से जिस शिक्षक को प्रधानाध्यापक होना चाहिए
वे आज शिक्षक बन कर अपने कनीय शिक्षक के आदेश का पालन करने के लिए मजबूर हैं. वहीं जिन्हें शिक्षक होना चाहिए वे जबरन प्रधानाध्यापक की कुरसी पर कब्जा जमाये हुए हैं. यह अलग बात है कि जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा 29 नवंबर 2014 को ही विद्यालय के वरीयतम शिक्षक श्रीराम चौधरी को प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाये जाने का आदेश जारी किया गया. लेकिन स्थिति यह है कि वे आज भी सहायक शिक्षक की हैसियत से जबरन बने प्रधानाध्यापक के अधीन काम करने को विवश हैं.
विभागीय खेल के पीछे सरकारी योजना की राशि
मध्य विद्यालय बसबिट्टी में 1698 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. इनमें वर्ग एक से आठ तक कुल 1295 जबकि वर्ग नौ एवं दस में कुल 403 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. वर्ग एक से आठ तक के बच्चों को सरकार द्वारा मध्याह्न भोजन, पोशाक, छात्रवृत्ति योजना का लाभ दिया जाता है. वहीं वर्ग नवम एवं दशम में पोशाक,
साइकिल एवं छात्रवृत्ति योजना के तहत राशि दी जाती है. जानकारों की मानें तो विद्यालय में फर्जी नामांकन, निजी विद्यालयों के छात्रों का नामांकन के कारण विद्यालय के प्रधान का पद काफी महत्वपूर्ण एवं मलाइदार हो जाता है. सूत्रों की माने तो नियम को ताक पर रख कर जबरन प्रभारी प्रधानाध्यापक बने शिक्षकों द्वारा अपनी अवैध कमाई का अधिक हिस्सा विभागीय पदाधिकारी को देते हैं. जिस कारण
विभागीय अधिकारियों की मेहरबानी ऐसे शिक्षकों पर बनी रहती है. मध्य विद्यालय बसबिट्टी के मामले में भी यही बात सामने आ रही है. सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि मध्य विद्यालय में सिर्फ पोशक क्षेत्र के ही बच्चों का नामांकन किया जा सकता है. जबकि मध्य विद्यालयों में पोशक क्षेत्र के बाहर के बच्चे भी नामांकित हैं. विद्यालय में नामांकित बच्चों की वास्तविक उपस्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब प्रभात खबर की टीम बुधवार को विद्यालय पहुंच कर वस्तु स्थिति का जायजा लिया तो पाया कि वर्ग नौ एवं दस में कुल नामांकित 403 बच्चों में से मात्र 25 छात्र-छात्रा ही उपस्थित थे.
मध्य विद्यालय बसबिट्टी में 1698 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. इनमें वर्ग एक से आठ तक कुल 1295 जबकि वर्ग नौ एवं दस में कुल 403 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. वर्ग एक से आठ तक के बच्चों को सरकार द्वारा मध्याह्न भोजन, पोशाक, छात्रवृत्ति योजना का लाभ दिया जाता है. वहीं वर्ग नवम एवं दशम में पोशाक, साइकिल एवं छात्रवृत्ति योजना के तहत राशि दी जाती है. जानकारों की मानें तो विद्यालय में फर्जी नामांकन, निजी विद्यालयों के छात्रों का नामांकन के कारण विद्यालय के प्रधान का पद काफी महत्वपूर्ण एवं मलाइदार हो जाता है.
सूत्रों की माने तो नियम को ताक पर रख कर जबरन प्रभारी प्रधानाध्यापक बने शिक्षकों द्वारा अपनी अवैध कमाई का अधिक हिस्सा विभागीय पदाधिकारी को देते हैं. जिस कारण विभागीय अधिकारियों की मेहरबानी ऐसे शिक्षकों पर बनी रहती है. मध्य विद्यालय बसबिट्टी के मामले में भी यही बात सामने आ रही है. सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि मध्य विद्यालय में सिर्फ पोशक क्षेत्र के ही बच्चों का नामांकन किया जा सकता है. जबकि मध्य विद्यालयों में पोशक क्षेत्र के बाहर के बच्चे भी नामांकित हैं.
विद्यालय में नामांकित बच्चों की वास्तविक उपस्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब प्रभात खबर की टीम बुधवार को विद्यालय पहुंच कर वस्तु स्थिति का जायजा लिया तो पाया कि वर्ग नौ एवं दस में कुल नामांकित 403 बच्चों में से मात्र 25 छात्र-छात्रा ही उपस्थित थे.
मामला काफी गंभीर है. संचिका के अवलोकन के बाद सरकार और विभाग के निर्देश का पालन किया जायेगा. चार वर्षों से जबरन प्रधानाध्यापक बनाये रखने के मामले में जो भी दोषी होंगे, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी.
मो हारुण, जिला शिक्षा पदाधिकारी, सुपौल
प्रधानाध्यापक का जनवरी 2013 में विभाग ने कर दिया है स्थानांतरण
सदर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय बसबिट्टी के तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक मो हकीम का जनवरी 2013 में विभाग द्वारा स्थानांतरण किया गया. स्थानांतरित प्रभारी प्रधानाध्यापक मो हकीम द्वारा विद्यालय के वरीयतम स्नातक प्रशिक्षित वेतनमान में पदस्थापित शिक्षक श्रीराम चौधरी एवं मैट्रिक प्रशिक्षित वेतनमान में वरीय शिक्षक श्यामदेव ठाकुर को विद्यालय का प्रभार नहीं दे कर कनीय मैट्रिक अप्रशिक्षित शिक्षक प्रमोद कुमार सिंह को प्रभार सौंप दिया गया. शिक्षा विभाग के अधिकारी व कर्मियों के मिलीभगत से बिना कोई विभागीय सक्षम आदेश के श्री सिंह दो वर्ष तक प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर जबरन काबिज रहे. दो वर्ष बाद विद्यालय के वरीयतम शिक्षक श्रीराम चौधरी के अभ्यावेदन पर विभाग की नींद खुली और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना ने अपने कार्यालय पत्रांक 2244 (नि) दिनांक 29 नवंबर 2014 के द्वारा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिख कर मध्य विद्यालय बसबिट्टी के वरीयतम शिक्षक श्रीराम चौधरी को विद्यालय का प्रभारी बनाते हुए बैंक को उनके हस्ताक्षर का नमूना भेजने का आदेश दिया. पत्र की प्रतिलिपि संबंधित बैंक के शाखा प्रबंधक को भी दी गयी. लेकिन आदेश जारी हुए दो वर्ष बीत जाने के बाद भी अनुपालन नहीं हो सका और प्रमोद कुमार सिंह जबरन प्रधानाध्यापक के पद पर बने हुए हैं.
