मांग आयोग के निर्देशों का नहीं किया गया अनुपालन
सुपौल नगर परिषद के लिए जारी आरक्षण सूची में पूर्व की तुलना में कई बदलाव किये गये हैं. इसको ले नगर परिषद क्षेत्र के कई लोगों में नाराजगी है.
सुपौल : राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा सुपौल नगर परिषद के लिये जारी आरक्षण सूची में पूर्व की तुलना में कई बदलाव किये गये हैं. जिसे लेकर नगर परिषद क्षेत्र के कई लोगों में नाराजगी का माहौल व्याप्त है. उनका कहना है कि जारी आरक्षण सूची में भेदभाव किया गया. ताकि निर्वाचन आयोग द्वारा पूर्व में घोषित मानकों का भी अनुपालन नहीं किया गया. गजना चौक वार्ड नंबर एक निवासी मो इरशाद आलम ने इस बाबत राज्य निर्वाचन आयोग पटना बिहार को पत्र लिख कर आरक्षण सूची में सुधार करने की मांग की है.
उन्होंने प्रेषित आवेदन में कहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा पूर्व में घोषणा की गयी थी कि जो वार्ड वर्ष 2007 से अब तक आरक्षित थे, उसमें बदलाव किया जायेगा. ऐसा भी निर्देश था कि जो वार्ड 2007 में दलितों व महादलितों के लिये आरक्षित था. उन वार्डों को दस वर्ष बाद सन् 2017 में होने वाले नगर निकाय चुनाव के दौरान सामान्य श्रेणी में रखा जायेगा. लेकिन दुर्भाग्य है कि आयोग द्वारा जारी सूची में इसका अनुपालन नहीं किया गया. बताया कि उदाहरण स्वरूप सुपौल नगर परिषद क्षेत्र का वार्ड नंबर एक जो पूर्व में दलित, महादलित के लिये आरक्षित था. उसे इस वर्ष जारी आरक्षण सूची में पिछड़ा वर्ग महिला श्रेणी में कर दिया गया है.
जबकि जारी घोषणा के मुताबिक इस वार्ड को इस बार के चुनाव में सामान्य श्रेणी में रखा जाना था. आवेदक श्री आलम ने इसके लिये स्थानीय स्तर पर आरक्षण सूची तैयार करने वाले अधिकारियों को जिम्मेदार बताया है. उन्होंने कहा है कि निर्वाचन आयोग का घोर उल्लंघन करते हुए सामान्य की जगह पिछड़ा वर्ग महिला की सूची जारी कर दी गयी. आयोग द्वारा भी उक्त सूची पर मुहर लगा दिया गया. जो कहीं से भी न्यायोचित नहीं प्रतीत होता है. श्री आलम सहित अन्य कई वार्ड वासियों ने आयोग को पत्र लिख कर वार्ड नंबर एक को पिछड़ा वर्ग महिला की जगह सामान्य श्रेणी में रखने का अनुरोध किया है. ताकि जनता को उचित न्याय मिल सके.
दस वर्षों से आरक्षित वार्ड को सामान्य श्रेणी में रखने का किया गया था वादा
आयोग के नियम के मुताबिक वार्ड नंबर एक को सामान्य श्रेणी में रखने की मांग
