परेशानी. छठे दिन भी नहीं हुई स्थिति सामान्य, सड़क पर भीड़ के कारण लगा जाम
आम आदमी अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए छोटे नोटों की खोज में इस बैंक से उस बैंक भटकते रहे.जिला मुख्यालय स्थित कई छोटे बैंक उपभोक्ताओं को नोट उपलब्ध कराने में अक्षम साबित हुई.
सुपौल : बड़े नोट बंद होने के छठे दिन भी जिला मुख्यालय सहित जिले के अन्य भागों में छोटो नोट प्राप्त करने के लिए लोगों के बीच अफरा तफरी का माहौल बना रहा. आम आदमी अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए छोटे नोटों की खोज में इस बैंक से उस बैंक भटकते रहे.जिला मुख्यालय स्थित कई छोटे बैंक उपभोक्ताओं को नोट उपलब्ध कराने में अक्षम साबित हुई. भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा सहित पंजाब नेशनल बैंक, यूनाइटेड बैंक, एडीबी की शाखाओं में सोमवार को नोट बदलने एवं राशि की निकासी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी.हालांकि सोमवार को डाकघर में राशि आ जाने के बाद लोगों को राशि उपलब्ध कराया गया.
लेकिन शहर के अधिकांश एटीएम बंद रहने की वजह से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.जिला मुख्यालय में केवल एसबीआइ व एडीबी के एटीएम से ही लोगों को राशि प्राप्त हो सका.सरकार द्वारा बड़े नोट के चलन पर प्रतिबंध लगाये जाने के बाद जिला मुख्यालय स्थित बाजार में बड़े नोटों का चलन बिल्कुल ही बंद हो गया है.
इस वजह से बाजार के व्यवसायियों का व्यवसाय भी बहुत हद तक प्रभावित हो रहा है.दुकानदार सामान के एवज में प्राप्त बड़े नोट का छुट्टा नहीं रहने के कारण सीधे ग्राहकों को लौटा रहे हैं.इस वजह से लोगों को आवश्यक सामानों की खरीदारी में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.स्थिति यह है कि बाजार में चिकित्सक फीस के तौर पर बड़े नोट स्वीकार कर रहे हैं तो शहर का एक भी दवा दुकानदार बड़ा नोट लेने के लिए तैयार नहीं है.दिन भर मरीज के परिजन दवा दुकानदारों के सामने चिरौरी करते नजर आ रहे हैं.
बैंक खुलने से पूर्व ही लग रही लंबी कतार: सोमवार को बड़े नोट बदलने के लिए एक बार फिर शहर के विभिन्न बैंकों में लोगों की लंबी कतार लगी हुई थी.शहर में विभिन्न बैंकों के सामने बैंक खुलने से एक घंटा पूर्व ही हजारों की संख्या में उपभोक्ता कतारबद्ध हो चुके थे.4500 रुपये बड़े नोट के बदले छोटे नोट प्राप्त करने की चाहत में ऐसे लोगों को घंटों कतार में रह कर राशि प्राप्त करने के लिए काफी मशक्कत करना
पड़ा.खास कर महिला व बुजुर्गों को बैंक में उमड़ी भीड़ के कारण कठिनाई का सामना करना पड़ा.कई उपभोक्ता तो बैंक शाखा में लगी भीड़ को देख कर उल्टे पांव वापस घर लौट गये.जबकि दर्जनों जरुरतमंद लोगों को दिन भर कतार में रहने के बावजूद राशि प्राप्त करने में सफलता हासिल नहीं हो पायी.इसकी मुख्य वजह यह थी कि बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में छोटे व नये करेंसी उपलब्ध नहीं थे.वहीं कुछ बैंकों में तो एक भी ग्राहकों को राशि प्राप्त नहीं हो सकी.
बड़े नोट पर लगाये गये प्रतिबंध के छठे दिन बड़े नोट बदलने और खाता में राशि जमा करने के लिए भारी संख्या में लोग शहर के सभी बैंकों में पहुंचे थे.सुबह 10:30 बजे ही सुपौल- सहरसा पथ स्थित भारतीय स्टेट बैंक की कृषि शाखा के सामने लगी ग्राहकों की अप्रत्याशित भीड़ की वजह से यातायात व्यवस्था संभालने में लगे पुलिस कर्मियों को काफी मशक्कत का सामना करते देखा गया.पुलिस ने भीड़ को देखते हुए सहरसा की ओर से आने वाले सभी वाहनों को गुदरी बाजार स्थित रोड से पास कराया.महावीर चौक के समीप कोसी रोड स्थित भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के सामने भी सैकड़ों महिला व पुरुषों की भीड़ जमा हो गयी थी.
नतीजतन इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को दूसरे रास्ते से घूम कर अपने गंतव्य तक जाना पड़ा.यही स्थिति नौ आना कचहरी रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा के समीप भी थी.ग्राहक व उनके द्वारा बेतरतीव तरीके से बीच सड़क पर लगाये गये वाहन व साइकिल की वजह से सोमवार को पूरे दिन इस मार्ग में वाहनों की आवाजाही बाधित रही.
ग्राहकों का इंतजार करते रहे पशु व्यवसायी : सोमवार को जिला मुख्यालय में साप्ताहिक हाट रहने की वजह से हजारों की संख्या में लोग जिले के विभिन्न भागों से पहुंचे थे.ऐसे लोगों को बाजार में आवश्यक सामानों की खरीदारी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.वहीं सुपौल के ऐतिहासिक मवेशी हाट पर भी दिन भर पशु व्यवसायियों को ग्राहकों का इंतजार करते देखा गया.कई पशु व्यवसायियों ने बताया कि बड़े नोट पर पाबंदी और छोटे नोट की अनुपलब्धता के कारण लोग पशुओं की खरीदारी नहीं कर रहे हैं.
वहीं इस साप्ताहिक हाट में पशु बेच कर अपनी जरूरत पूरा करने के उद्देश्य से पहुंचे किसानों को भी निराशा ही हाथ लगी.दिन भर इंतजार करने के बावजूद उन्हें पशु बिक्री में सफलता हासिल नहीं हुई.वहीं मेला संवेदक हंसराज यादव ने बताया कि विगत साप्ताहिक हाट के वनिस्पत सोमवार को पशुओं की खरीद-बिक्री कम हुई है.उन्होंने बताया कि स्थिति सामान्य होने में अभी वक्त लगेगा.
किसानी भी हो रही प्रभावित : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 व 1000 रुपये के बड़े नोट पर प्रतिबंध लगाये जाने के बाद जहां बाजारों की रौनक चली गयी है.वहीं जिले के ग्रामीण इलाकों में कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है.ज्ञात हो कि गेहूं, आलू, सरसों, मक्का सहित सब्जी लगाने का यह अनुकूल समय है.बारिश का मौसम समाप्त होते ही किसानों द्वारा अपने खेत को तैयार कर लिया गया था.
अब उन्हें बुआई के लिए बीज व खाद की नितांत आवश्यकता है.लेकिन बड़े नोटों का चलन बंद होने तथा छोटे नोट की अनुपलब्धता के कारण किसानों को खाद व बीज क्रय करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.सदर प्रखंड के एकमा पंचायत स्थित बारा गांव निवासी दिनेश यादव, लोकेश यादव, दिलीप यादव, हटवरिया निवासी भागवत मंडल, ब्रह्मदेव मंडल आदि ने बताया कि खाद व बीज के अभाव में खेती में विलंब हो रहा है.इसका असर अगले फसल पर भी पड़ेगा.
