समस्या. दाल में प्रति किलो 15 रुपये की हुई बढ़ोतरी, आम जन हलकान
दबे पांव महंगाई ने एक बार फिर अपना साम्राज्य पसार दिया है. खास कर खाद्य वस्तुओं में अचानक हुई मूल्य वृद्धि के कारण मध्यम और निम्न तबके के आय वाले घरों में परेशानी उत्पन्न हो गयी है. दाल, चीनी और तेल जैसे अति आवश्यक खाद्य वस्तुओं के मूल्य वृद्धि ने तो गृहणियों का बजट चौपट कर रख दिया है.
सुपौल : पंचायत चुनाव के शोर-गुल के बीच दबे पांव महंगाई ने एक बार फिर अपना साम्राज्य पसार दिया है. खास कर खाद्य वस्तुओं में अचानक हुई मूल्य वृद्धि के कारण मध्यम और निम्न तबके के आय वाले घरों में परेशानी उत्पन्न हो गयी है. दाल, चीनी और तेल जैसे अति आवश्यक खाद्य वस्तुओं के मूल्य वृद्धि ने तो गृहणियों का बजट चौपट कर रख दिया है. महंगाई से परेशान उपभोक्ता एक किलो की जगह आधा किलो समान खरीद कर गुजारा करने के लिये मजबूर हैं. वहीं अचानक बढ़ी महंगाई का कारण लोगों के समझ से बाहर है.
जानकार इसे मुनाफा खोरों की करतूत बता रहें हैं. बाजार के जानकार बताते हैं कि सरकार और प्रशासन का बाजार पर ठोस अंकुश नहीं रहने के कारण कालाबाजारी करने वाले माफिया तत्व इस अनचाही महंगाई के असली जिम्मेदार हैं. बहरहाल आम उपभोक्ताओं के लिये यह महंगाई किसी अनचाहे मुसीबत से कम नहीं है. एक नजर अगर बाजार पर डाले तो नजर आता है कि महज दो माह के अंदर अरहर, मसूर, चना जैसे दालों के कीमत में प्रति किलो 15 से 20 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. वहीं चीनी के दाम में 05 से 06 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है.
कुछ यही स्थिति मसाला बाजार का भी है. वहीं उपभोक्ताओं को रूलाने में सब्जी बाजार भी पीछे नहीं है. एक माह पहले तक 20 रुपये किलो मिलने वाला परवल अब वर्तमान में 40 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. वहीं 12 रुपये बिकने वाला बैंगन अब 40 रुपये किलो बाजार में उपलब्ध है. खुदरा व्यवसायी अपनी समस्या बताते हुए कहते है कि जिस मूल्य में थोक माल खरीद कर लायेंगे. उसे अपने मुनाफा के बाद ही उपभोक्ता को उपलब्ध करवायेंगे.
किराना दुकानों में भी दिखायी दे रहा महंगाई का असर
किराना दुकानों में महंगाई का प्रकोप इन दिनों कुछ ज्यादा ही असर दिखा रहा है. अल्प आमदनी वाला तबका अब दाल की बढ़ी कीमतों के कारण दाल खाने से तौबा कर रहा है. वर्तमान बाजार की कीमतों पर एक नजर डाले तो दाल सहित अन्य वस्तुओं के कीमतों में हुई अप्रत्याशित वृद्धि का आकलन किया जा सकता है.
