दहेज हत्या के मामले में पति व देवर को आजीवन कारावास

सुपौल : अपर जिला व सत्र न्यायाधीश लल्लन लाल श्रीवास्तव की अदालत ने सोमवार को दहेज के लिए विवाहिता की हत्या के मामले में मृतका के पति व देवर को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. वहीं न्यायाधीश ने हत्या के बाद शव को छुपाने व नदी में फेंकने के आरोप में […]

सुपौल : अपर जिला व सत्र न्यायाधीश लल्लन लाल श्रीवास्तव की अदालत ने सोमवार को दहेज के लिए विवाहिता की हत्या के मामले में मृतका के पति व देवर को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. वहीं न्यायाधीश ने हत्या के बाद शव को छुपाने व नदी में फेंकने के आरोप में दोनों अभियुक्त रंजीत सिंह और रामवृक्ष सिंह को दोषी मानते हुए तीन साल की सश्रम कारावास सहित दस-दस हजार रुपये का आर्थिक दंड की सजा भी सुनाई है.

राशि जमा नहीं करने पर दोनों दोषियों को एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी. विवाहिता के हत्या की घटना निर्मली थाना क्षेत्र के बेला सिंगार मोती गांव में 16 अक्तूबर 2013 को घटित हुई थी. इस मामले में मधुबनी जिला के झंझारपुर गांव निवासी मृतक विवाहिता सरिता देवी के पिता राम बाबू सिंह के सूचना पर निर्मली थाना में कांड संख्या 60/13 दर्ज किया गया था. प्राथमिकी में राम बाबू सिंह ने कहा था कि उनकी पुत्री सरिता देवी की शादी निर्मली थाना क्षेत्र के बेला सिंगार मोती गांव निवासी रंजीत सिंह के साथ वर्ष 2005 में हुआ था.

शादी के बाद सरिता को पति सहित ससुराल वाले एक लाख रुपया व बाइक मायके से लाने का दबाव बना कर प्रताड़ित कर रहे थे. 16 अक्तूबर 2013 को सरिता की हत्या कर सबूत मिटाने के लिए शव को छुपा दिया गया था. इस मामले में सूचक के द्वारा पति रंजीत सिंह समेत देवर रामवृक्ष सिंह, जंगली लाल व रामकुमार पर सरिता की हत्या लगाते हुए नामजद अभियुक्त बनाया गया था. सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने जंगली लाल और राम कुमार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया.

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