परवान चढ़ रहा सुपौल का ऐितहािक मेला
शो-तमाशे का आनंद उठा रहे लोग
सुपौल : जिला मुख्यालय में गणतंत्र दिवस के अवसर पर लगने वाला ऐतिहासिक मेला परवान चढ़ने लगा है़ राष्ट्रीय सार्वजनिक मेला समिति द्वारा आयोजित इस मेले में लगा मीना बाजार, विभिन्न प्रकार के झूले, शो-तमाशे, होटल व अन्य स्टॉल आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बना हुए है़
मेले में लोगों की भीड़ उमड़ने लगी है़ पौराणिक संस्कृति के अनुरूप आवश्यक सामग्री की जम कर खरीदारी की जा रही है़ मेले मे शिरकत करने वाले लजीज व्यंजनों का भी लुत्फ भी उठा रहे है़
एक माह तक चलने वाले इस मेले में प्रति दिन मवेशी हाट भी लगाया जाता है, जो स्थानीय किसानों, पशुपालकों व व्यापारियों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है़ मेला संवेदक हंसराज यादव व रमेंद्र कुमार रमण ने बताया कि मेले में बिजली, पेयजल, सुरक्षा आदि की पुख्ता व्यवस्था की गयी है़
मेले की रौनक बढ़ा रहा मीना बाजार
मेले में लगे मीना बाजार की रौनक बरबस लोगों को अपनी ओर खींच रही है़ बाजार में रंग-बिरंगे दर्जनों दुकान मौजूद है, जहां कॉस्मेटिक्स, चूड़ियां, सौंदर्य प्रसाधन, क्रॉकरी, कटलरी, खिलौने, बर्तन आदि के दुकान सजे है़
फिक्स प्राइस की दुकानों पर सभी वर्ग के लोगों की भीड़ देखी जा रही है़ यहां विशेष कर महिलाओं द्वारा अपने जरूरतों की चीज खरीदी जा रही है़ मेले में कई बड़े व छोटे होटलों द्वारा ग्राहकों के पसंद के अनुरूप व्यंजन परोसे जा रहे है़ ग्राहकों की भीड़ भेलपूरी, बटाटा पूरी, बनारसी भूजा, गोलगप्पे, चाउमिन, एगरोल, आइसक्रीम आदि जैसे फास्ट फूड काउंटरों पर अधिक देखी जा रही है़ अचार के काउंटर पर महिलाओं की विशेष रुचि दिख रही है़
असम से आये बेंत के फर्नीचर
मेले में फर्नीचरों का स्टॉल भी लगाया गया है, जहां लकड़ी के साथ ही बेंत से तैयार फर्नीचर मौजूद है़असम व बंगाल के कारीगरों द्वारा निर्मित बेंत की कुरसियां, दीवान व सोफे लोगों को लुभा रहे है़ वहीं काष्टकारों द्वारा बनाये गये पलंग, कुरसियां आदि भी खूब बिक रही है़ मेले में यूं तो हर वर्ष झूले लगते हैं, लेकिन इस वर्ष पहली बार आये कुछ आधुनिक झूले विशेषकर बच्चों व युवाओं को रोमांचित कर रहे है़ं राम झूला, रेल झूला, टोरा-टोरी, डिस्को झूला, नाव झूला, घोड़ा गाड़ी जैसे अनेक झूले सभी उम्र के लोगों को लुभा रहे है़
मौत का कुआं बना आकर्षण का केंद्र
मेला में इस साल पहली बार आया त्रिशक्ति मारुति सर्कस लोगों के मनोरंजन का केंद्र बना हुआ है़ मौत का कुआं नाम से प्रचलित इस तमाशे में चार बाइक व दो मारुति कार का एक चलायी जा रही है़
एक छोटे से सीमित घेरे में बाइकर्स व मारुति चालक की जांबाजी लोगों को दांतों तले अंगुलिया दबाने को मजबूर कर देती है़ कठिन परिस्थिति में हाथ छोड़ कर बाइक व मारुति चलाना, तेज रफ्तार से चलती गाड़ी में दो चालकों का आपस में हाथ मिलाना, दर्शकों को हैरत में डाल रहे हैं.
