वीरपुर(सुपौल) : कुसहा त्रासदी के आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी विकास के मामले में जमीनी हकीकत कोसों दूर है. त्रासदी के आठ वर्ष के दौरान सरकार सहित कई राज नेताओं द्वारा अनेकों तरह का आश्वासन दिया गया. यहां तक कि इस क्षेत्र के बेहतर बनाये जाने का भी दावा किया गया. लेकिन समुचित विकास के दावों का पोल खुल रहा है. मालूम हो कि इस क्षेत्र में स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा सहित अधिकांश व्यवस्था बदतर बना हुआ है. साथ ही उक्त व्यवस्था को सुदृढ़ किये जाने को लेकर विभाग भी उदासीन बना हुआ है. जिस कारण लोगों को भारी परेशानी हो रही है.
एक पुल के लिए तरस रहा बड़ी आबादी : बसंतपुर प्रखंड के तकरीबन 35 हजार की आबादी वाले कोचगामा पंचायत एक अदद पुल निर्माण के लिए तरस रहा है. जिस कारण प्रखंड मुख्यालय जाने के लिए उन लोगों को 14 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. कोचगामा पंचायत के भगवानपुर, शुभंकरपुर, बेरिया चौधरी, मोहनपुर, हिंडोलवा एवं बलभद्रपुर पंचायत के ब्रहमपुर, लालपुर, पदमपुर, कोइली, सहजपुर सहित अन्य गांवों के लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. 2008 में आयी त्रासदी के बाद से वीरपुर जेल से पूरब बसे गांवों में सड़क निर्माण कार्य अब तक नहीं कराया जा सका है.
लोगों का मानना है कि इस मामले में प्रखंड सहित जिला स्तर पर संचालित विभाग उदासीन बना हुआ है. जिस कारण लोगों को मोहनपुर हहीया धार के उपर लगाया गया चचरी पुल के माध्यम से आवागमन करने को विवश हो रहे हैं. कोचगामा पंचायत के पूर्व मुखिया शाह जमाल उर्फ लाल ने बताया कि जिला पदाधिकारी के द्वारा अबिलंब ग्रामीणों की मांग पर विचार नहीं किया गया तो वे जिला प्रशासन के खिलाफ सड़क जाम कर प्रदर्शन करेंगे.
