शिक्षा विभाग में नियम को ताक पर रख कर लिये जा रहे हैं गलत फैसले -डीइओ द्वारा जारी आदेश को डीपीओ ने किया संशोधित- छह माह के अंदर तीन बार हुआ कनीय अभियंताओं का स्थानांतरण- पब्लिक विजिलेंस कमेटी ने की कार्रवाई की मांगप्रतिनिधि, सुपौलशिक्षा विभाग के खेल भी निराले हैं. अपनी कार्यशैली की वजह से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले इस विभाग के अधिकारियों के लिए नियम-कानून कोई मायने नहीं रखता. यही वजह है कि विभागीय अधिकारी द्वारा अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए गलत फैसले लिये जा रहे हैं. इतना ही नहीं अधिकारी अपने वरीय पदाधिकारियों द्वारा जारी आदेश को भी संशोधित करने से परहेज नहीं बरतते. जबकि यह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है. ऐसे ही एक मामले का खुलासा पब्लिक विजिलेंस कमेटी के सचिव अनिल कुमार सिंह द्वारा आयुक्त कोसी प्रमंडल एवं क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक को आवेदन दे कर की गयी शिकायत से हुआ है.आवेदन में श्री सिंह द्वारा अधिकारियों के कार्यशैली पर कई सवाल खड़े किये गये हैं. क्या है मामलाजिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा राज्य परियोजना निदेशक, बिहार शिक्षा परियोजना परिषद पटना द्वारा जारी निर्देश के आलोक में जिले में कनीय अभियंताओं के योगदान के फलस्वरूप अपने कार्यालय ज्ञापांक 1683 (एसएसए) दिनांक 18 नवंबर 2014 द्वारा छह कनीय अभियंताओं को प्रखंड आवंटित किया गया. पुन: उनके द्वारा तीन माह बाद ज्ञापांक 183 (एसएसए) दिनांक 26 फरवरी 2015 द्वारा असैनिक निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं तकनीकी कारणों से आंशिक संशोधन करते हुए तीन कनीय अभियंता के आवंटित प्रखंड को बदल कर नया प्रखंड आवंटित किया गया. पुन: तीन माह के भीतर डीपीओ द्वारा इसमें संशोधन कर अभियंताओं के आवंटित प्रखंड में फेरबदल कर दिया गया.डीपीओ का आदेश नियम संगत नहींकनीय अभियंताओं को प्रखंड आवंटित से संबंधित पत्र कार्यालय आदेश 1683 दिनांक 18 नवंबर 2014 एवं ज्ञापांक 183 दिनांक 26 फरवरी 2015 जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा निर्गत किया गया. जबकि कार्यालय आदेश ज्ञापांक 489 (नि) (एसएसए) दिनांक 23 मई 2015 के माध्यम से आंशिक संशोधन पत्र जिला कार्यक्रम पदाधिकारी प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान के द्वारा निर्गत किया गया जो नियम संगत नहीं है. क्योंकि पत्र निर्गत करने वाले पदाधिकारी ही पत्र का संशोधन कर सकते हैं. डीपीओ द्वारा जारी आदेश उनके गलत मंशा को परिलक्षित करता है. छह माह में तीन बार हुआ स्थानांतरणकनीय अभियंताओं के जिला में योगदान के छह माह के भीतर आवंटित प्रखंड में तीन-तीन बार बदलाव किया गया. उदाहरण स्वरूप कनीय अभियंता राजीव कुमार का पदस्थापन 18 नवंबर 2014 को राघोपुर प्रखंड, पुन: तीन माह बाद 26 फरवरी 2015 को त्रिवेणीगंज प्रखंड तथा फिर तीन माह के भीतर किसनपुर प्रखंड आवंटित किया गया. प्रखंड बदलने का आधार असैनिक निर्माण कार्य की गुणवत्ता बताया गया है. अब सवाल यह उठता है कि यदि असैनिक निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हुई तो दोषी कनीय अभियंता के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए थी ना कि उनका स्थानांतरण.मो आलम बने मो मोबश्शीरजिला में योगदान के बाद प्रखंड आवंटन के समय जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा निर्गत कार्यालय आदेश के क्रमांक 04 पर अंकित कनीय अभियंता का नाम मो आलम है. जबकि डीपीओ द्वारा दिनांक 23 मई 2015 को निर्गत पत्र में कनीय अभियंता मो आलम का नाम बदल कर मो मोबश्शीर आलम कर दिया गया.जो काफी गंभीर एवं जालसाजी का मामला प्रतीत होता है. इनके प्रमाण पत्र एवं नियुक्ति पत्र एवं स्थानांतरण पत्र के जांच की आवश्यकता है. दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग पब्लिक विजिलेंस कमेटी के सचिव अनिल कुमार सिंह ने आयुक्त एवं आरडीडीइ को दिये आवेदन में दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई किये जाने की मांग किया है. उन्होंने आवेदन के माध्यम से डीपीओ प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान द्वारा निर्गत पत्र को निरस्त करते हुए दोषी पदाधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई करने का आग्रह किया है. संचिका के अवलोकन के बाद यदि इस प्रकार की गलती सामने आती है तो विधि सम्मत कार्रवाई की जायेगी. मो जाहिद हुसैन, जिला शिक्षा पदाधिकारी,सुपौल
शक्षिा विभाग में नियम को ताक पर रख कर लिये जा रहे हैं गलत फैसले
शिक्षा विभाग में नियम को ताक पर रख कर लिये जा रहे हैं गलत फैसले -डीइओ द्वारा जारी आदेश को डीपीओ ने किया संशोधित- छह माह के अंदर तीन बार हुआ कनीय अभियंताओं का स्थानांतरण- पब्लिक विजिलेंस कमेटी ने की कार्रवाई की मांगप्रतिनिधि, सुपौलशिक्षा विभाग के खेल भी निराले हैं. अपनी कार्यशैली की वजह से […]
