उदासीनता. 30 लाख की लागत से बना जल मीनार पड़ा है बेकार

सरायगढ़ : कोसी इलाके लोगों के लिए शुद्ध पेयजल की उपलब्धता बड़ी समस्या रही है. यहां के पानी को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से पीने योग्य नहीं समझा जाता है. यही कारण है कि सरकार द्वारा क्षेत्र के लोगों को स्वच्छ पेय जल मुहैया कराने को लेकर विभिन्न योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है. इसी […]

सरायगढ़ : कोसी इलाके लोगों के लिए शुद्ध पेयजल की उपलब्धता बड़ी समस्या रही है. यहां के पानी को स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से पीने योग्य नहीं समझा जाता है. यही कारण है कि सरकार द्वारा क्षेत्र के लोगों को स्वच्छ पेय जल मुहैया कराने को लेकर विभिन्न योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है.

इसी क्रम में सरकार द्वारा स्थानीय बीएन इंटर महाविद्यालय परिसर में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा लोगों को स्वच्छ व शुद्ध पेयजल मुहैया कराने को लेकर जल मीनार का निर्माण किया गया. लेकिन लगभग 30 लाख रुपये की लागत से बना यह जल मीनार यहां के लोगों के लिए शोभा की वस्तु बन कर रह गया है.

निर्माण के बाद एक सप्ताह जरूर आम लोगों को जल मीनार से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की गयी थी, लेकिन उसके बाद से यह बिल्कुल बंद पड़ा है. संवेदक की लापरवाही के कारण वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का सामान अभी भी बाहर में बेकार पड़ा है. आम लोगों को जल मीनार के निर्माण के बाद उम्मीद थी कि अब यहां के लोगों को शुद्ध पीने का पानी मिल सकेगा, लेकिन बेकार व बंद पड़ा जल मीनार यहां के लोगों को मुंह चिढ़ा रहा है.

जलमीनार के रख-रखाव सहित अन्य मदों से राशि की निकासी की जा रही है. इसे विभागीय लापरवाही कहें या कुछ और हकीकत यही है कि जनहित के लिए बनाया गया यह जलमीनार यहां के लोगों के लिए किसी काम का नहीं रह गया है. कहते हैं चिकित्सकपीएचसी प्रभारी डॉक्टर राम निवास प्रसाद का कहना है कि लौह युक्त पानी पीने से डायरिया, पोलियो, टाइफाइड, घेघा, पीलिया सहित कई अन्य पेट जनित रोग की संभावना रहती है.

इस इलाके में सबसे बड़ी समस्या शुद्ध पानी की उपलब्धता की है. लोगों को स्वस्थ रहने के लिए फील्टर युक्त पानी का उपयोग जरूरी है. तभी पेट जनित रोगों से बचाव हो सकेगा.कहते हैं स्थानीय लोगप्रो अवध नारायण सिंह ने बताया कि छात्र व छात्राओं के साथ यहां के लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए हम लोगों ने कॉलेज की जमीन जल मीनार के निर्माण के लिए दी. ताकि यहां के लोगों को शुद्ध पेयजल मिल सके, लेकिन इसके चालू करने की दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं की गयी.

इसका परिणाम है कि आज तक यह जल मीनार चालू नहीं हो सका है.सुरेश प्रसाद सिंह बताते हैं कि जलमीनार के बनने से यहां के लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब शुद्ध पेयजल मिलेगा, पर दुर्भाग्य है कि जलमीनार बनने के बावजूद लोग लौह युक्त पानी पीने को विवश हैं.डाॅ कृष्ण कुमार सिंह कहते हैं कि जल मीनार के निर्माण के बाद यहां के ढ़ाई किलोमीटर की परिधि के लोगों को शुद्ध पेयजल प्राप्त होता. लेकिन संवेदक द्वारा लूट-खसोट कर इसे बंद करवा दिया गया.

डाॅ राज कुमार यादव ने बताया कि सरकार की तीस लाख की राशि से बना जल मीनार यहां के लोगों के किसी काम का नहीं रह गया. जल मीनार का चालू नहीं होना विभाग की लापरवाही को दर्शाता है.विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि संवेदक व पूर्व अधिकारियों की लापरवाही के कारण जल मीनार की ये दुर्दशा है. महादेव पासवान का कहना है कि आज कल सरकारी राशि के लूट का फैशन हो गया है. किसी को भी आम अवाम के हित से कोई लेना-देना नहीं है.

यही कारण है कि जलमीनार के निर्माण काल के समय से ही इसके कार्यों में अनियमितता बरती जा रही थी. उस समय आवाज उठाया जाता, तो आज यहां के लोगों को शुद्ध पेयजल मिल रहा होता.कहते हैं कार्यपालक अभियंताएक सप्ताह चलने के बाद बंद पड़े जलमीनार की बाबत कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार ने बताया कि प्लांट जल्द ही चालू होगा.

चुनाव को लेकर प्लांट को चालू करने में विलंब हुआ है. संवेदक द्वारा वाटर ट्रीटमेंट प्लाॅट नहीं लगाये जाने की बारे में पूछे जाने पर श्री कुमार ने बताया कि संवेदक को अविलंब वाटर ट्रीटमेंट प्लाॅट लगाने का निर्देश दिया गया है. समय पर ऐसा नहीं करने पर संवेदक के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया अपनायी जायेगी.

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