श्रद्धा हो तो जल्द हो जाता है काम: शिवानंद जी महाराज

सुपौल : मुख्यालय स्थित राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा से चौथे दिन बुधवार को भी वातावरण भक्तिमय बना रहा. प्रवचन के दौरान स्वामी शिवानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन दर्शन से संबंधित ज्ञान दिया. स्वामी जी ने बताया कि प्राणियों को तत्व ज्ञान की प्राप्ति के उपरांत तत्व निष्ठा में समय […]

सुपौल : मुख्यालय स्थित राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा से चौथे दिन बुधवार को भी वातावरण भक्तिमय बना रहा. प्रवचन के दौरान स्वामी शिवानंद जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन दर्शन से संबंधित ज्ञान दिया. स्वामी जी ने बताया कि प्राणियों को तत्व ज्ञान की प्राप्ति के उपरांत तत्व निष्ठा में समय लगता है,

पर मुक्ति में संदेह नहीं रहता. उन्होंने कहा कि तत्वज्ञ में कुछ कोमलता रहती है, लेकिन तत्व निष्ठ में स्वत: स्वाभाविक दृढ़ता होती है. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार नींद खुलने पर कुछ देर तक आंखों में भारीपन रहता है, क्योंकि आंख प्रकाश सहन नहीं कर पाता है. ऐसे ही तत्व ज्ञान होने पर पूर्व का कुछ संस्कार रहता है. वहीं तत्व निष्ठा होने पर यह संस्कार नहीं रहता. बताया कि तत्वज्ञ का व्यवहार जल में लकीर खींचने के समान है.

इसके साथ ही उन्होंने तत्व निष्ठ के व्यवहार को आकाश को रेखांकित किये जाने के समरूप बताया. श्रद्धा हो तो बनते हैं काम स्वामी शिवानंद जी ने कहा कि निष्ठा स्वत: होती है. मनुष्यों को अपनी-अपनी प्रवृति के अनुसार तत्व निष्ठा होने में कम या अधिक समय लगता है. साधक असत को जितना महत्व देता है, उतनी ही देरी लगती है और जितनी बेपरवाह कार्य करता है, निष्ठा की प्राप्ति उतनी ही जल्द होती है. उन्होंने कहा कि तीव्र जिज्ञासा, वर्तमान परिस्थिति में संतोष न होना, अपने में कमी का अनुभव होना तथा वह कभी सह्य न हो तो शीघ्र ही कार्य चरम पर पहुंच जाता है.

अत्यंत श्रद्धा हो तो जल्दी काम बन जाता है. संत कह दे कि अमुक पदार्थ सोने का है, तो वह वैसा ही प्रतीत होने लगता है. उनका कहना था कि स्वयं में अनंत शक्तियां निहित हैं, पर तत्व ज्ञान होने के साथ ही वे सभी शक्तियां प्रकट होती हैं. तत्व ज्ञानी महापुरुष युंजान योगी कहलाता है. उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि ऐसे योगी जहां भी वृत्ति लगाता है.

वहीं शक्ति प्रकट हो जाती है. भक्त जनों से कहा कि ‘ सुख संगेन बध्नाति ज्ञान संगेन चानघ’ यानी तत्व ज्ञान सर्वथा असंग है. सात्विक ज्ञान में देखने वाला रहता है. पर तत्व ज्ञान में द्रष्टा नहीं रहता. वहीं सात्विक ज्ञान में ‘ मैं ज्ञानी हूं’ इस प्रकार की विशेषता का अपने में भान होता है.

आठ प्रकार के होते हैं अंतरंग साधन महाराज जी ने बताया कि तपस्या के माध्यम से प्राणी परंपरागत ब्रह्म ज्ञान प्राप्त कर सकता है, पर साक्षात रूप से नहीं. वेदांत में आठ प्रकार के अंतरंग साधन दृष्टिगत हैं. विवेक, वैराग्य, शमादिषट संपत्ति, मुमुक्षुता, श्रवण, मनन, निदिध्यासन और तत्व पदार्थ संशोधन ज्ञात है. उन्होंने कहा कि गीता में ज्ञान को तप माना गया है.

उन्होंने कहा कि शारीरिक तप साधन में सहायक तो हो सकता है, पर उससे ब्रह्म ज्ञान नहीं हो सकता. शारीरिक तप से अभिमान भी पैदा हो सकता है. लेकिन तत्व ज्ञान होने पर यह नहीं रहता. इसका मतलब होता है कि हमारी जिज्ञासा पूरी हो गयी. तत्वबोध से विवेक होता है प्रकाशितस्वामी जी ने बताया कि तत्व ज्ञान होने पर बोध में कोई फर्क नहीं होता.

जब तक तत्वज्ञ महा पुरुष का शरीर रहता है तब तक पूर्व के अभ्यास अथवा स्वभाव के कारण उसका विवेक बढ़ता रहता है. विवेक बढ़ने से उसकी विवेचन भी स्पष्ट तथा अच्छी हो जाती है और उसमें नये नये दृष्टांत युक्तियां भी आती हैं. उदाहरण देते हुए स्वामी जी ने बताया कि गैस बत्ती का मेंटल जलने के बाद विशेष प्रकाश देता है. ऐसे ही तत्व बोध होने के बाद उस महापुरुष का विवेक विशेष रूप से प्रकाशित होने लगता है. यह विशेषता चेतन में नहीं आती, प्रत्युत जड़ में होती है.

इसका कारण है कि तत्व बोध होने पर जड़ चेतन का सर्वथा विभाग हो जाता है, यानी जड़ चेतन की ग्रंथि टूट जाती है. कथा श्रवण को लेकर उमड़ी भीड़ श्रीमद भागवत कथा के दौरान भक्त जनों की भीड़ लगी रही.

व्यवस्थापक मोहन प्रसाद चौधरी ने बताया कि श्रीमद भागवत कथा 28 नवंबर तक चलेगी. कथा श्रवण करने आये भकों को कठिनाई का सामना न कर पड़े. इसको लेकर कथा स्थल पर समुचित प्रबंध किया गया है. श्री चौधरी ने बताया कि कथा का आयोजन स्वामी शिवानंद जी महाराज द्वारा सुबह व अपराह्न दो सत्र में हो रहा है.

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