सुपौल: प्राकृतिक आपदाओं से हमेशा अभिशप्त कोसी के सपने एक बार फिर बिखर गये हैं, उम्मीदें टूटी हैं और किसान हताश हैं. इस बार ना केवल गेहूं की बाली दगा दे गयी, बल्कि बेमौसम बारिश ने किसानों को मजदूर बनने की राह पर चलने को विवश कर दिया है. हताशा का आलम यह है कि अब किसान खेतों में खड़ी गेहूं फसल को खेत में ही जला देना बेहतर समझने लगे हैं. कृषि विभाग ने राज्य सरकार से 20.30 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है.
गेहूं की बालियों में दाना नहीं : कोसी के किसानों की जान सांसत में हैं. एक तरफ सरकारी दर पर अनुदानित बीज से उन्हें निराशा मिली, तो दूसरी तरफ हाइब्रीड बीज इस्तेमाल करने वाले किसानों की स्थिति भी आसमान से गिरे खजूर पर अटके जैसी रही. बड़े पैमाने पर गेहूं की बालियों में दाना नहीं रहने की शिकायत मिल रही है. सीमावर्ती क्षेत्र में नेपाली बीज का इस्तेमाल करने वाले किसानों की स्थिति कुछ बेहतर रही. ऐसे में किसान अब भविष्य में गेहूं की फसल नहीं लगाने की कसमें खा रहे हैं. किसनपुर प्रखंड के थरबिट्टा के किसान प्रमोद चौधरी ने बताया कि अब भविष्य में कभी गेहूं की खेती नहीं करेंगे.
हताश किसान जलाने लगे हैं फसल : दरअसल गेहूं और धान दो ऐसी खेती है, जिसके बूते कोसी के किसानों के सपने साकार होते हैं. इसमें गेहूं इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसकी खेती में धान के अनुपात में अधिक लागत लगानी पड़ती है. पर, इस बार की स्थिति यह है कि लागत का 50 फीसदी भी वापस मिल पाना मुश्किल नजर आ रहा है. यही वजह है कि अब हताश किसान खेत में खड़ी गेहूं की फसल में ही आग लगाने लगे हैं. मंगलवार को सदर प्रखंड के कर्णपुर गांव के किसान फेकू चौधरी ने दो कट्टे में लगी गेहूं की फसल को आग के हवाले कर दिया. निराशा का आलम यह है कि प्रकृति के हाथों पिट चुके किसान अब दो वक्त की रोटी के लिए परदेस की ओर रुख करने की सोच रहे हैं.
34 फीसदी फसल बरबाद
30 मार्च की बेमौसम बारिश के बाद कृषि विभाग ने गेहूं फसल की क्षति का स्थलीय निरीक्षण कराया. आपदा नियमों के अनुसार, 50 फीसदी से अधिक फसल की क्षति पर ही मुआवजा देने का प्रावधान है. प्रति हेक्टेयर नौ हजार रुपये मुआवजा का दर निर्धारित है. सर्वे के अनुसार जिले में 60 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोयी गयी थी. 30 मार्च की बारिश में लगभग 20 हजार हेक्टेयर गेहूं की फसल बरबाद हुई है. 12 को हुई बारिश का जिले में आंशिक असर रहा है. इससे हुई क्षति का आकलन विभाग द्वारा किया जा रहा है.
बेमौसम बारिश में धुल गये सपने
30 मार्च की बेमौसम बारिश ने गेहूं के किसानों की कमर ही तोड़ दी. बारिश के साथ आंधी आयी और कहीं -कहीं ओलावृष्टि भी हुई. नतीजा यह हुआ कि इस आफत की बारिश ने व्यापक स्तर पर फसलों को प्रभावित किया है. गेहूं के साथ-साथ मक्का, मूंग और सूर्यमुखी की फसल भी प्रभावित हुई है. रही-सही कसर 12 अप्रैल की शाम हुई बारिश ने पूरी कर दी. सरायगढ़ के किसान राजेंद्र पंडित और श्रीलाल मेहता कहते हैं कि बीज ने धोखा दिया और जो बचा था उसे बारिश ने धो दिया.
