सुपौल : आनंद मार्ग प्रचारक संघ के साधकों ने बुधवार को पंच दधीचि उच्च विद्यालय आनंद पल्ली अमहा चौघारा स्थित आश्रम में नीलकंठ दिवस मनाया. इस अवसर पर प्रभात संगीत एवं अष्टाक्षरी सिद्ध महामंत्र बाबा नाम केवलम् कीर्तन का गायन किया गया.
सामूहिक साधना के उपरांत साधकों को संबोधित करते हुए आचार्य धनंजयानंद अवधूत ने कहा कि मानव कल्याण के लिए समर्पित आनंद मार्ग के संस्थापक भगवान श्री आनंदमूर्ति जी को 12 फरवरी 1973 को बांकीपुर सेंट्रल जेल पटना में जेल अधिकारियों के इशारे पर डॉक्टर रहमतुल्ला द्वारा जहर दिया गया था. जिसके कारण गुरुदेव का कंठ नीला हो गया था. इसीलिए इस घटना को लोग नीलकंठ दिवस के रूप में मनाते हैं.
शिक्षक राजीव ने बताया कि उस समय की मौजूदा सरकार द्वारा षड्यंत्र के तहत कई प्रकार के अपराधिक एवं अपने ही अनुयायियों की हत्या के मुकदमे दर्ज किए गए और आनंद मार्ग खत्म करने की योजना बनाई गई. बाबा ने दवा के नाम पर विष प्रयोग की जांच की मांग राष्ट्पति प्रधानमंत्री एवं बिहार के राज्यपाल से की.
लेकिन पत्रों की अवहेलना कर सरकार ने विष प्रयोग की न्यायिक जांच करने की अपील को ठुकरा दिया. पटना हाई कोर्ट से हत्या मामले से बरी हो बाबा जेल से रिहा हो गए. तब से ही आनंद मार्ग के अनुयायियों द्वारा पाप शक्ति के विरुद्ध अनवरत संग्राम का संकल्प एवं जरूरतमंदों की सेवा प्रत्येक वर्ष 12 फरवरी को पूरे विश्व भर में की जाती है.
श्री राम नारायण ने बताया कि आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम (ग्लोबल) के स्वयंसेवकों द्वारा लगभग एक सौ छात्रों के बीच मिठाइयां एवं फल का वितरण किया गया. इस अवसर उपेंद्र, संजीव, राजीव, गोपाल बाबू, नागेश्वर जी, सरयू बाबू एवं अनेक शिक्षक बंधु उपस्थित थे.
