सुपौल : केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किसानों के आर्थिक समृद्धि के लिए दर्जनों योजनाएं संचालित की जा रही है. लेकिन योजना के सफल क्रियान्वयन नहीं होने से किसानों को सरकार के लाभकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है. जिस कारण किसान दिनों दिन आर्थिक रूप से विपन्न हो रहे हैं.
वहीं किसान अब परंपरागत खेती करने की भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं. सरकारी स्तर पर किसानों द्वारा उत्पादित अनाजों का ससमय खरीद नहीं किया जाना भी किसानों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर रही है. इलाके के किसान अपने उत्पादित अनाज को बेचकर ही दूसरे फसल को खेतों में लगाते हैं.
लेकिन फसल के उचित कीमत नहीं मिलने के कारण किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं. ऐसे में किसान अपने उत्पादित फसल को ससमय बेचना चाहते हैं. लेकिन सरकारी स्तर पर किसानों के उत्पादित अनाजों का क्रय ससमय नहीं किये जाने पर किसान खुले बाजार में अनाज को कम दामों पर बेचने को मजबूर होते हैं.
15 नवंबर से 15 दिसंबर तक करते हैं गेहूं की बुआई
इलाके के किसान खरीफ फसल के बाद 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक खेतों में गेहूं की बुआई करते हैं. बताया जाता है कि इस अवधि में गेहूं की बुआई करने पर उच्च कोटि के गेहूं का उत्पादन होता है. लिहाजा किसान इस अवधि के अंदर ही गेहूं बुआई कर लेना चाहते हैं. धान अधिप्राप्ति के लिए भी जिले में हर वर्ष 15 नवंबर से ही किसानों का धान क्रय किये जाने का निर्देश सहकारिता विभाग से जारी किया जाता रहा है.
लेकिन इस वर्ष अब तक जिले में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य की भी घोषणा नहीं की गई है. पिछले वर्ष जिले में धान अधिप्राप्ति का न्यूनतम लक्ष्य 66 हजार एमटी रखा गया था. धान के लिए अनुकुल मौसम रहने के कारण इलाके में धान की अच्छी पैदावार हुई है. किसानों का धान यदि से समय से नहीं बिक पाता है तो गेहूं बुआई में उनलोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा.
रबी फसल को लेकर परेशान हैं किसान
इलाके में खरीफ फसल की अंधाधुंध कटाई शुरू हो गयी है. किसान धान की फसल को काट कर रबी फसल के लिए खेतों की तैयारी में जुट गये हैं. फसल की कटाई के साथ ही धान का भंडारण भी शुरू कर दिया है. भंडारित धान को बेच कर ही किसान रबी फसल की बुआई में जुटते हैं. इसके के लिए किसानों को अन्य फसल की तुलना में खेतों की अधिक सिंचाई करना पड़ता है.
गेहूं की बुआई के लिए जैविक व रासायनिक खाद भी जरूरत पड़ती है. अन्य फसल की तुलना में रबी फसल में किसानों को अधिक लागत लगाना पड़ता है. धान की बिक्री के बाद ही किसान रबी फसल के लिए बीज व खाद की खरीदारी करते हैं. लेकिन सरकारी स्तर पर धान क्रय के संदर्भ में किसी प्रकार की हलचल नहीं देख जिले के किसान रबी फसल को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं.
धान खरीद के लिए नहीं हो रही कार्यवाही
जानकारी मुताबिक जिले में पैक्सों के माध्यम से किसानों का धान क्रय किया जाता है. इसके लिए क्रियाशील पैक्सों को धान अधिप्राप्ति का केंद्र बनाया जाता है. जहां किसान सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर धान बेचते हैं. इसके लिए सहकारिता विभाग द्वारा धान की फसल कटाई से पूर्व ही धान अधिप्राप्ति के लिए कार्यवाही प्रारंभ कर दी जाती है. लेकिन इस बार धान अधिप्राप्ति की दिशा में अब तक किसी प्रकार की कार्यवाही प्रारंभ नहीं की गयी है.
जिस कारण किसानों का ससमय धान अधिप्राप्ति संभव होता नहीं दिख रहा. ससमय किसानों के धान क्रय के लिए यदि केंद्र की स्थापना नहीं की गई तो एक बार फिर किसान खुले बाजार में औने-पौने दामों पर धान बेचने को मजबूर होंगे.
कहते हैं पदाधिकारी
चुनाव को लेकर पैक्स के कमेटी को भंग कर दिया गया है. पैक्स संबंधित कार्य के लिए प्रशासक की नियुक्ति की गयी है. जिसमें संबंधित प्रखंड के बीसीओ एवं पैक्स प्रबंधक को शामिल किया गया है. पैक्स संबंधित कार्य नये कार्यकारणी के गठन तक प्रशासक द्वारा ही किया जायेगा.
धान अधिप्राप्ति के लिए अभी लक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है. इस संदर्भ में निर्देश मिलते ही अग्रेतर कार्रवाई की जायेगी. जिले में 09 दिसंबर 2019 से 23 दिसंबर 2019 तक पैक्स का चुनाव संपन्न करा लिया जायेगा.
अरविंद कुमार पासवान, जिला सहकारिता पदाधिकारी, सुपौल
