किशनपुर : प्रखंड अंतर्गत बरहत्था तुलापट्टी ग्राम में बुधवार को भागवत यादव की धर्मपत्नी मृतक उमदा देवी के मृत्युभोज पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने को लेकर सामाजिक जीवन बैठक का आयोजन किया गया.
जिसमें अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा के जिला अध्यक्ष डॉ अमन कुमार के द्वारा कर्तापुत्र रमेश यादव को मृत्युभोज पर पूर्ण प्रतिबंध से संबंधित अनुरोध पत्र समर्पित किया गया. सर्व सम्मति से मृत्युभोज पर पूर्ण विराम लगाने का निर्णय लिया गया.
साथ ही श्राद्ध कर्म दिन 101 फलदार पौधा वितरण पर सहमति बनी. मौके पर डॉ कुमार ने कहा कि जीव की उत्पत्ति मिट्टी, अग्नि, वायु, जल, आकाश पंच तत्वों से मिलकर हुई हैं. देहांत के बाद सभी तत्व अपने अपने स्थान पर चले जाते हैं. मृत्युभोज का कर्ज चुकाने में जिंदा लोगों को तिल-तिलकर मरना होता है.
भोज के बहाने हर आदमी अपनी तुलना अपने से ज्यादा धनी लोगों से करने लगता है. दूसरों की देखा -देखी लोग अंधाधुंध खर्च करते हैं.
इस खर्च को पूरा करने के लिए सीधे-सादे लोग या तो कर्ज लेते हैं या अपनी जमीन-जायदाद बेच देते हैं. फिजूलखर्ची द्वारा धनी बनने का ढोंग कहीं से भी औचित्य नहीं है. मृत्युभोज और फिजूलखर्ची पर समाज को रोक लगाना चाहिए.
कहा कि माता-पिता और गुरु संसार में जीता जागता देवता है. मृत्युभोज पर खर्च होने वाले राशि को वृद्ध व जीवित अवस्था मे माता-पिता की सेवा, भोजन, सुख सुविधा और इलाज में खर्च करें. इसी से प्रत्यक्ष देवता माता-पिता से संतान को आर्शीवाद प्राप्त होगा. इतिहास व पुराणों में माता-पिता भक्ति के कारण ही श्रवण कुमार अमर है. मां-बाप वो भगवान है जो इंसान को बनाया है.
सादा जीवन उच्च विचार को अपनाने से ही हिन्दुस्तान की आन बान शान बढ़ेगी. भोज की जगह जनहित का कार्य करें. मौके पर जिला सचिव ओमप्रकाश यादव, पंडित सुखराम यादव ,प्रदीप यादव, शशि कुमार, उपेन्द्र यादव सुरेन्द्र यादव आदि शामिल थे.
