क्षमता के अनुरूप नहर में नहीं है पानी, कैसे होगी खेती किसानी

मुसीबत. सिंचाई विभाग की निष्क्रियता व लापरवाही से किसान परेशान वर्षा नहीं होने के कारण राघोपुर प्रखंड क्षेत्र के किसान नहर के पानी पर आश्रित हैं. ऐसे में नहर का पानी भी उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों के बीच हाहाकार की स्थिति बनी हुई है. सिमराही : सिंचाई विभाग की निष्क्रियता व लापरवाही से […]

मुसीबत. सिंचाई विभाग की निष्क्रियता व लापरवाही से किसान परेशान

वर्षा नहीं होने के कारण राघोपुर प्रखंड क्षेत्र के किसान नहर के पानी पर आश्रित हैं. ऐसे में नहर का पानी भी उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों के बीच हाहाकार की स्थिति बनी हुई है.
सिमराही : सिंचाई विभाग की निष्क्रियता व लापरवाही से किसानों को धान की रोपाई में परेशानी हो रही है. खेतों में लगाये जाने वाले धान का बिचड़ा तैयार है. वहीं बीते कुछ दिनों से बारिश भी नहीं हो रही है. जिस कारण किसान निराश हैं. मालूम हो कि स्थानीय विभाग द्वारा राजपुर शाखा नहर में मात्र 300 क्यूसेक पानी ही छोड़ा गया है. राजपुर शाखा नहर की क्षमता दो हजार क्यूसेक का है. किसानों की मानें तो राजपुर शाखा से मधेपुरा, गम्हरिया, सहरसा एवं सुपौल उपशाखा नहरों में पानी भेजा जाता है.
किसानों ने कहा है कि इस क्षेत्र में नहरों का जाल बिछाये जाने के बावजूद भी सिंचाई विभाग के अभियंताओं की लापरवाही के कारण खरीफ व रबी फसलों में किसानों को नहर की पानी से ससमय सिंचाई नहीं हो पाती है. साथ ही विभाग द्वारा बिना सिंचाई के ही किसानों से पटवन की राशि वसूल की जाती है. यहां तक कि कागजी तौर पर इस क्षेत्र को सिंचित घोषित कर दिया गया है. वहीं किसानों को विभाग द्वारा सिंचाई सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
कहते हैं अभियंता
सिंचाई प्रमंडल के ईई अरुण कुमार ने बताया कि राशि के अभाव में माइनर एवं ग्रामीण नालाओं की मरम्मति नहीं करायी जा सकी है. इस संबंध में जिला पदाधिकारी के मीटिंग में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत माइनर एवं ग्रामीण नालों के जीर्णोद्धार कराने का प्रस्ताव भेजा गया था. राजपुर नहर एवं उनसे निकलने वाली उपशाखा नहरों में कम पानी छोड़े जाने के बाबत उन्होंने बताया कि तीन-चार दिनों के भीतर राजपुर शाखा नहर एवं उपशाखा नहरों में भी पानी बढ़ाया जायेगा.
पानी नहीं होने की वजह से किसानों में हाहाकार
गौरतलब हो कि वर्षा नहीं होने के कारण राघोपुर प्रखंड क्षेत्र के किसान नहर के पानी पर आश्रित हैं. ऐसे में नहर का पानी भी उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों के बीच हाहाकार की स्थिति बनी हुई है.
बायसी पंचायत के किसान शिवनंदन यादव, रमन गुरमैता, ललन गुरमैता, राजकुमार गुरमैता, गौसपुर गांव के लक्ष्मी नायक, भीमराज नायक, विकास चंद्र मिश्र, करजाईन पंचायत के बिंदेश्वर मरिक, दर्प नारायण यादव, त्रिलोक ठाकुर, दुर्बल झा सहित अन्य ने बताया कि मधेपुरा, गम्हरिया, सुपौल उपशाखा नहर में 500 घनफुट तथा सहरसा उप शाखा नहर में 550 घनफुट पानी की क्षमता है. लेकिन शाखा नहर को मात्र 300 क्यूसेक पानी दिया गया है. साथ ही उपशाखा नहरों की सफाई भी नहीं करायी गयी है. किसानों ने अविलंब नहरों में पानी बढ़ाने एवं सभी माइनरों एवं ग्रामीण नालाओं की मरम्मति करवाने की मांग की है. ताकि किसान ससमय धान की रोपाई संपन्न कर सके.

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