Siwan News : सीवान के गुठनी प्रखंड और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों धान की सोहनी (निकाई-गुड़ाई) का कार्य तेजी से चल रहा है. महिला मजदूर सुबह घर के कामकाज निपटाने के बाद खेतों में पहुंचकर धान की फसल से खरपतवार हटाने में जुटी हैं. उनकी मेहनत खेती के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है.
महंगाई के बीच परिवार का सहारा बनीं महिला मजदूर
महंगाई के दौर में महिला मजदूरों की आय परिवार के लिए बड़ा सहारा बन रही है. धान की रोपनी के समय भी महिलाओं ने पुरुष मजदूरों के साथ मिलकर खेतों में काम किया था. अब रोपनी पूरी होने के बाद निकाई-गुड़ाई का अधिकांश कार्य भी महिलाएं ही संभाल रही हैं.
खरपतवार हटाना क्यों है जरूरी
किसानों के अनुसार शुरुआती दौर में बारिश की कमी और नहरों से पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण रोपनी प्रभावित हुई थी. इस वजह से खेतों में खरपतवार तेजी से उग आए. यदि समय पर सोहनी नहीं कराई जाए तो खरपतवार धान के पौधों के पोषक तत्वों को सोख लेते हैं, जिससे फसल की पैदावार प्रभावित हो सकती है. इसी कारण इन दिनों सोहनी का काम युद्धस्तर पर कराया जा रहा है.
कई गांवों में तेजी से चल रहा कार्य
बलुआ, मैरीटार, बरपालिया, जतौर, सेमाटार और नैनीजोर सहित कई गांवों के बांगर क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सोहनी का कार्य चल रहा है. दूर स्थित खेतों तक महिला मजदूरों को पहुंचाने के लिए किसान ट्रैक्टर की व्यवस्था कर रहे हैं. करीब चार घंटे काम करने के बाद उन्हें वापस घर पहुंचाया जाता है. इस कार्य के लिए प्रति महिला मजदूर 150 रुपये मजदूरी दी जा रही है.
खेतों में लहलहा रही धान की फसल
किसानों ने बताया कि इस वर्ष धान की रोपनी दो चरणों में पूरी हुई. जुलाई के तीसरे सप्ताह तक लगभग 56 प्रतिशत रोपनी हो चुकी थी. बाद में बारिश और नहरों में पानी आने से शेष खेतों में भी रोपनी पूरी हो गई. अब खेतों में धान की फसल अच्छी स्थिति में है और किसान नियमित रूप से उसकी निगरानी कर रहे हैं.
किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद
खाप जतौर गांव के किसान शिवजी दीक्षित, मैरीटार के बैकुंठ दुबे, विंध्याचल सिंह, चंद्रशेखर राय और रट्टू राय सहित कई किसानों ने बताया कि फिलहाल धान की फसल रोगमुक्त है. यदि आगे भी मौसम अनुकूल बना रहा तो इस वर्ष अच्छी पैदावार मिलने की पूरी संभावना है.
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