31 मई तक चावल उपलब्ध कराने का लक्ष्य

जिले में चावल (सीएमआर) आपूर्ति की रफ्तार काफी धीमी रहने पर राज्य स्तर से सख्ती बढ़ा दी गई है. जिले में 252 समितियों के माध्यम से 16 हजार 757 किसानों से कुल 96 हजार 47 टन धान की खरीद की गई थी, लेकिन इसके विरुद्ध अब तक मात्र 33 हजार 263 टन सीएमआर ही बिहार राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध कराया जा सका है. लक्ष्य की तुलना में यह प्रगति काफी कम मानी जा रही है, जिस पर राज्य सरकार ने चिंता जताई है.निबंधक, सहयोग समितियां बिहार रजनीश कुमार सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि 15 मई तक निर्धारित लक्ष्य का कम से कम 75 प्रतिशत तथा 31 मई तक शत-प्रतिशत सीएमआर बिहार राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध करायी जाये.

प्रतिनिधि, सीवान. जिले में चावल (सीएमआर) आपूर्ति की रफ्तार काफी धीमी रहने पर राज्य स्तर से सख्ती बढ़ा दी गई है. जिले में 252 समितियों के माध्यम से 16 हजार 757 किसानों से कुल 96 हजार 47 टन धान की खरीद की गई थी, लेकिन इसके विरुद्ध अब तक मात्र 33 हजार 263 टन सीएमआर ही बिहार राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध कराया जा सका है. लक्ष्य की तुलना में यह प्रगति काफी कम मानी जा रही है, जिस पर राज्य सरकार ने चिंता जताई है.

निबंधक, सहयोग समितियां बिहार रजनीश कुमार सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि 15 मई तक निर्धारित लक्ष्य का कम से कम 75 प्रतिशत तथा 31 मई तक शत-प्रतिशत सीएमआर बिहार राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध करायी जाये.

इसके लिए जिलों को दैनिक कार्ययोजना बनाकर समितियों, राइस मिलरों तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए तेजी से कार्य करने का निर्देश दिया गया है. निबंधक द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के अंतर्गत राज्य में कुल 36.79 लाख टन धान अधिप्राप्ति हुई है. जिसके समतुल्य 24.65 लाख मीट्रिक टन चावल राज्य खाद्य निगम को उपलब्ध कराया जाना है. लेकिन राज्य भर में मात्र 13.71 लाख मीट्रिक टन यानी 55.63 प्रतिशत सीएमआर की ही आपूर्ति हो सकी है. कई जिलों की प्रगति राज्य औसत से नीचे है, जिससे सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है.पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पिछले खरीफ विपणन मौसम 2024-25 में कई समितियों द्वारा निर्धारित समय-सीमा के भीतर चावल आपूर्ति नहीं की गई थी. इसके कारण राज्य खाद्य निगम से भुगतान मिलने में विलंब हुआ था.

भुगतान में देरी से समितियों को अतिरिक्त ब्याज देना पड़ा और कई समितियों के कैश क्रेडिट खाते डेबिट बैलेंस में चले गए थे. इसका असर समितियों की आर्थिक स्थिति पर पड़ा . निबंधक ने कहा है कि अधिप्राप्ति कार्य सरकार की गारंटी के तहत बड़ी ऋण राशि पर आधारित है.ऐसे में समय पर सीएमआर उपलब्ध नहीं होने से ऋण वापसी की प्रक्रिया प्रभावित होती है और इसका वित्तीय असर पूरे तंत्र पर पड़ता है. इसलिए निर्धारित अवधि के भीतर चावल जमा कराना हर हाल में सुनिश्चित किया जाए. डीएम को भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि वे जिला स्तर पर प्रतिदिन समीक्षा करें, समितियों और मिलरों की प्रगति पर नजर रखें तथा जहां कार्य धीमा है वहां तत्काल हस्तक्षेप करें. इसके साथ ही बिहार राज्य खाद्य निगम के संग्रहण केंद्रों पर पर्याप्त भंडारण क्षमता उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है ताकि सीएमआर जमा करने में किसी तरह की बाधा न आए.

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By Deepak Mishra

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