सीवान में मोती एवं झींगा पालन के लिए मिलेंगे 60 प्रतिशत अनुदान, जानिए कैसे लें लाभ

Siwan News: सीवान में मोती एवं झींगा पालन के लिए अब 60 प्रतिशत का अनुदान मिलेगा. डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से जिले में मत्स्य प्रजाति के विविधिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इसकी शुरूआत की गई है. योजना का लाभ लेने वाले लाभुकों को प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता भी उपलब्ध करायी जायेगी. इससे किसानों और मत्स्य पालकों को पारंपरिक कार्यों के साथ नई तकनीक एवं आधुनिक योजनाओं से जोड़ने की योजना है.

Siwan News: (विवेक कुमार सिंह की रिपोर्ट) डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से जिले में मत्स्य प्रजाति के विविधिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मोती एवं झींगा पालन योजना की शुरुआत की गई है. विभाग की इस पहल से जिले के किसानों और मत्स्य पालकों को रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है. साथ ही पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलेगा. जिससे किसानों की आमदनी में भी वृद्धि होगी.

अनुदान की सुविधा उपलब्ध

विभाग द्वारा दोनों योजनाओं के लिए अनुदान की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें. जिला मत्स्य कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार मोती पालन योजना के तहत जिले में तीन यूनिट लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. एक यूनिट स्थापित करने के लिए आधा एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी. इस योजना में कुल दो लाख 24 हजार 600 रुपये की लागत आएगी. जिसमें सरकार की ओर से 60 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा. योजना का लाभ लेने वाले लाभुकों को प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता भी उपलब्ध करायी जायेगी ताकि वे वैज्ञानिक तरीके से मोती उत्पादन कर बेहतर आय प्राप्त कर सकें.

किसानों और मत्स्य पालकों की बढ़ेगी आमदनी

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि मोती पालन आज के समय में एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में तेजी से उभर रहा है. बाजार में प्राकृतिक मोती की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के लोग इस योजना से जुड़कर कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं. मोती पालन के लिए तालाब एवं जल स्रोत का सही उपयोग किया जायेगा. जिससे जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन भी संभव हो सकेगा. इसके अलावा विभाग की ओर से झींगा पालन योजना भी शुरू की गई है. जिले में इसके लिए दो यूनिट का लक्ष्य रखा गया है. एक यूनिट स्थापित करने में करीब एक लाख 10 हजार रुपये खर्च आएगा. इसके लिए भी आधा एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी. सरकार की ओर से इस योजना में भी 60 प्रतिशत अनुदान दिया जायेगा. विभाग का मानना है कि झींगा पालन के माध्यम से किसानों को कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है. देश और विदेश के बाजारों में झींगा की मांग लगातार बढ़ रही है. जिससे यह व्यवसाय रोजगार और आय का अच्छा माध्यम बन सकता है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती: जिला मत्स्य पदाधिकारी

जिला मत्स्य पदाधिकारी चंदन कुमार ने कहा कि सरकार की मंशा है कि किसानों और मत्स्य पालकों को पारंपरिक कार्यों के साथ नई तकनीक एवं आधुनिक योजनाओं से जोड़ा जाये. मोती पालन और झींगा पालन जैसी योजनाएं स्वरोजगार को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी. उन्होंने बताया कि इच्छुक लाभुक विभागीय कार्यालय से संपर्क कर योजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. आवेदन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है तथा पात्र लाभुकों का चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जायेगा. उन्होंने कहा कि विभाग लगातार ऐसी योजनाएं चला रहा है. जिससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें और मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में जिला आत्मनिर्भर बन सके.

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Published by: Nikhil Anurag

Nikhil Anurag is a contributor at Prabhat Khabar.

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