Non-communicable diseases: गैर संचारी रोगों की समय रहते पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में “जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार” अभियान शुरू किया जाएगा. यह अभियान 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक चलेगा. इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर लोगों की स्क्रीनिंग करेंगी. संदिग्ध अथवा रोग से ग्रसित मरीजों को आवश्यक परामर्श, दवा, जांच और उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान से जोड़ा जाएगा.
अभियान में 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. इस दौरान उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मुंह, स्तन और गर्भाशय के मुख के कैंसर, हृदय रोग, नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज की स्क्रीनिंग की जाएगी. समय पर बीमारी की पहचान होने से उपचार शुरू करने के साथ जोखिम कारकों को कम करने और असामयिक मौतों को रोकने में मदद मिलेगी.
घर-घर तैयार होगा फैमिली फोल्डर
अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता और एएनएम घर-घर जाकर प्रत्येक परिवार का फैमिली फोल्डर तैयार करेंगी. कम्युनिटी बेस्ड असेसमेंट चेकलिस्ट के माध्यम से उच्च जोखिम वाले लोगों की पहचान की जाएगी. स्क्रीनिंग से संबंधित जानकारी मोबाइल आधारित एनसीडी एप्लीकेशन पर दर्ज की जाएगी.
संदिग्ध मरीजों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर सहित नजदीकी स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ता सहयोग करेंगी. आयुष्मान आरोग्य मंदिर में 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों की लंबाई और वजन मापकर बीएमआई निकाला जाएगा. इसके बाद विभिन्न गैर संचारी रोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी. गंभीर या जटिल मामलों को उच्चतर स्वास्थ्य संस्थान में रेफर किया जाएगा.
टेली-कंसल्टेशन से मिलेगा चिकित्सकीय परामर्श
जरूरत पड़ने पर टेली-कंसल्टेशन के माध्यम से चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा. मरीजों को आवश्यकता के अनुसार 30 दिनों तक की दवा भी उपलब्ध कराने का प्रावधान है. स्वास्थ्य संस्थानों में सीबीसी, ब्लड शुगर, एचबीए1सी, लिपिड प्रोफाइल, लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट, ईसीजी, पैप स्मीयर, बायोप्सी, विटामिन-डी3, विटामिन-बी12, टी3, टी4 और टीएसएच जैसी जांच की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है.
उपचार के बाद भी होगा मरीजों का फॉलोअप
अभियान के तहत उपचार के बाद मरीजों का नियमित फॉलोअप भी किया जाएगा. आशा कार्यकर्ता मरीजों को दवा नियमित रूप से लेने और प्रत्येक माह स्वास्थ्य संस्थान आने के लिए प्रेरित करेंगी. अभियान की प्रगति और आंकड़ों की प्रखंड एवं जिला स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी.
समय पर जांच और उपचार पर जोर
सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद ने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल मरीजों की पहचान करना नहीं, बल्कि बीमारी के जोखिम की शुरुआती अवस्था में पहचान कर लोगों को जीवनशैली में बदलाव और समय पर उपचार के लिए प्रेरित करना है. इससे “समय पर जांच, समय पर पहचान और समय पर उपचार” को बढ़ावा मिलेगा.
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