सीवान. नगर परिषद सीवान के सफाई कर्मी और कर्मचारी गुरुवार से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये. बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (एक्टू) के राज्य सचिव अमित कुमार के नेतृत्व में कर्मियों ने नगर परिषद कार्यालय से शहर में विरोध मार्च निकाला और कार्यपालक पदाधिकारी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही. कई मुहल्लों में कूड़ा का उठाव नहीं होने से गंदगी पसरी रही, जबकि नगर परिषद कार्यालय का कामकाज भी ठप पड़ गया. जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, नक्शा पास कराने, टैक्स जमा करने समेत कई जरूरी कार्य नहीं होने से शहरवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. यूनियन अध्यक्ष अमित कुमार ने कहा कि नगर परिषद के कर्मी वर्षों से अपनी जायज मांगों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं. कई बार मौखिक रूप से और पत्र लिखकर प्रशासन को समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला. उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कर्मी हड़ताल पर जाते हैं, उस समय प्रशासन समझौता कर आंदोलन खत्म करवा देता है, लेकिन बाद में मांगों को पूरी तरह नजर अंदाज कर दिया जाता है. बताया कि पांच फरवरी को हुए हड़ताल के दौरान जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय द्वारा पत्र जारी कर नगर परिषद प्रशासन को निर्देश दिया गया था कि जब तक कर्मियों का बकाया इपीएफ, इएसआईसी और वेतन भुगतान नहीं हो जाता, तब तक संबंधित मद में कोई भुगतान नहीं किया जाये. इसके बावजूद कर्मियों को उनका बकाया पैसा नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि कई चेक भी काटे गए, लेकिन कर्मियों के खाते में राशि नहीं पहुंची. यूनियन नेताओं ने कहा कि उस समय कार्यपालक पदाधिकारी, सिटी मैनेजर और स्वच्छता प्रभारी के साथ वार्ता हुई थी. जिसमें यह सहमति बनी थी कि 90 लाख रुपये कर्मियों के ईपीएफ मद में भेजे जायेंगे और बाकी भुगतान जल्द कर दिया जायेगा. इसी आश्वासन के बाद हड़ताल समाप्त की गयी थी. लेकिन बाद में न तो 90 लाख रुपये का भुगतान हुआ और न ही किसी कर्मी को बकाया राशि मिली. इससे कर्मियों में भारी नाराजगी और निराशा फैल गयी.
नगर परिषद प्रशासन पर लगे गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप : कर्मियों ने बताया कि 16 अप्रैल को फिर आवेदन देकर अपनी मांगों को पूरा करने की मांग की गयी, लेकिन नगर परिषद प्रशासन की ओर से न तो कोई पहल हुई और न ही यूनियन से बातचीत की गयी. इसके बाद मजबूर होकर कर्मियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला लिया. यूनियन अध्यक्ष ने नगर परिषद प्रशासन पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाये. उन्होंने कहा कि 465 कर्मियों के नाम पर एनजीओ को टेंडर दिया गया है, लेकिन केवल 150 से 200 कर्मियों से ही काम कराया जा रहा है और बाकी राशि की बंदरबांट की जा रही है. कहा कि इस खेल में नीचे से ऊपर तक अधिकारी और नेता शामिल हैं. इसके अलावा बिना बोर्ड से पास कराए निजी लाभ के लिए 23 ट्रैक्टर खरीदने का भी आरोप लगाया गया. कहा कि जब कर्मी अपनी समस्याओं को लेकर कार्यपालक पदाधिकारी के पास जाते हैं तो उनके साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज की जाती है, जिससे कर्मियों में काफी आक्रोश है. इसी के विरोध में शहर में मार्च निकालकर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया गया. हड़ताल पर गये कर्मियों की मुख्य मांगों में बकाया इपीएफ और इएसआइसी राशि का भुगतान, सभी कर्मियों का ईएसआईसी कार्ड बनवाना, मृत कर्मियों के आश्रितों को लाभ राशि देना, पंप ऑपरेटरों का बकाया भुगतान, स्वच्छता साथियों की मजदूरी, स्थायी कर्मियों का छठा और सातवां वेतनमान अंतर राशि, दैनिक कर्मियों को रविवार अवकाश का लाभ, ड्रेस कोड और कर संग्रहकर्ताओं का लंबित कमीशन भुगतान शामिल है. हड़ताल के कारण नगर परिषद कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा. आम लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए घंटों भटकना पड़ा. शहर में सफाई नहीं होने से कई इलाकों में कूड़े का अंबार लग गया. यूनियन नेताओं ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगा.
