जयंती पर अकीदत के साथ मौलाना मजहरूल हक की मजार पर चादरपोशी

मौलाना के दोनों बेटे हसन व हुसैन के मजार पर भी चादरपोशी

हुसैनगंज . फरीदपुर रमना गांव स्थित स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मजहरुल हक साहब की जयंती पर सोमवार को खिराजे अकीदत पेश किया गया. 159वीं जयंती समारोह के मौके पर मजार पर चादरपोशी को लेकर सुबह से ही आशियाना परिसर में जिले से लेकर स्थानीय नेताओं, जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों का आगमन शुरू हो गया था. सुबह से ही परिसर के एक तरफ मदरसे के बच्चों द्वारा कुरानखानी की जा रही थी. सवा ग्यारह बजे एमएलसी, जदयू नेता रमेश सिंह कुशवाहा, मौलाना के परपोता शादाब फारूकी व पदाधिकारियों ने मजार पर चादरपोशी की. उसके बाद मौलाना मजहरुल हक के दोनों बेटे हसन व हुसैन के मजार पर भी चादरपोशी की गई. इसके अलावा सभी पदाधिकारियों ने मौलाना मजहरुल हक के तैलचित्र पर माल्यार्पण किया. इस दौरान उनके परपोता शादाब फारूकी ने अधिकारियों को बुके देकर सम्मानित किया.

नुक्कड़ नाटक से कुरीतियों पर किया प्रहार

कार्यक्रम की शुरुआत फरीदपुर मध्य विद्यालय के छात्राओं द्वारा स्वागत गान से किया गया. नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने एवं पर्यावरण को स्वच्छ रखने का संदेश दिया गया. वहीं विद्यार्थियों ने सामाजिक एकता को प्रस्तुत करते हुए झांकी निकाली. मौके पर अतिथि एमएलसी विनोद जायसवाल, पूर्व विधायक सह पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी,जीरादेई विधायक भीष्म प्रताप सिंह, दरौली के पूर्व विधायक अमरनाथ यादव, जिप अध्यक्ष संगीता चौधरी, मौलाना साहब के प्रपौत्र शादाब फारुकी, डीडीसी मुकेश कुमार, एडीएम प्रमोद कुमार राम सहित अन्य पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने मौलाना मजहरुहल हक के स्वजनों के साथ संयुक्त रूप से मौलाना साहब एवं उनके पूर्वजों के मजार पर चादरपोशी कर पुष्प अर्पित किया तथा उनके तैल्य चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया. साथ ही उनके आदर्शों को आत्मसात करने पर बल दिया.

स्वजन ने लगाया वादाखिलाफी का आरोप

मौलाना साहब के स्वजन शादाब फारूकी ने बताया कि सरकार 1991 से मौलाना साहब की जयंती को राजकीय समारोह के साथ मनाने की घोषणा की गई थी. इसमें राज्य के मंत्री एवं जिला पदाधिकारी पहुंचकर मौलाना साहब के मजार पर चादरपोशी करते आए हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से न तो सरकार का कोई मंत्री आ रहे हैं और ना ही जिला पदाधिकारी. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सरकार धीरे- धीरे मौलाना साहब को भूलने की प्रयास कर रही है.

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By Shashi Kant Kumar

Shashi Kant Kumar is a contributor at Prabhat Khabar.

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