सीवान. रविवार को आंबेडकर संवाद कक्ष में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि गोपालगंज वन प्रमंडल अधिकारी मेधा यादव ने कहा कि प्रकृति और नारी दोनों ही सृजन का आधार है. नारी का सम्मान समाज में सकारात्मकता का संचार करता है. उन्होंने बताया कि उनके गांव में लड़कियों के पढ़ने की अच्छी व्यवस्था नहीं थी. लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम के बल पर उन्होंने अपने सपने को साकार किया. मौजूदा दौर में नारी को सहानभूति की नहीं जरूरत नही है. नारी को जागरूक और आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता है. जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने कहा कि नारी सशक्तिकरण के लिए जिला प्रशासन सदैव प्रयासरत है. केंद्र और राज्य सरकार की नारी सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं को संजीदगी से क्रियान्वित किया जा रहा हैं. इसके पहले स्थापना उपसमाहर्ता जूली कुमारी द्वारा अतिथियों को पौधा और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया. राजवंशी देवी इंटर कॉलेज की बालिकाओं ने संगीत शिक्षक तेजनाथ यादव के नेतृत्व में स्वागत गान प्रस्तुत किया. समारोह में पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा, डीडीसी मुकेश कुमार, सिविल सर्जन श्रीनिवास कुमार, महाराजगंज अनुमंडल पदाधिकारी अनीता सिन्हा, पीजीआरओ इस्तियाक अली ने अपने विचार व्यक्त किए. महाराजगंज एसडीएम अनीता सिन्हा, जिला सामान्य शाखा प्रभारी शालू कुमारी, डीपीओ आईसीडीएस तरणि कुमारी, सीओ कुमारी नेहा, बीडीओ अंजली कुमारी, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी राजनंदिनी साह, डॉ. रीता सिन्हा, डॉ. सविता कुमारी, पिंकी कुमारी, मुखिया संध्या देवी, आशिता गुप्ता, दुर्गा कुमारी, प्रिया कुमारी, अंकिता शर्मा, नीतू कुमारी, काजल कुमारी, लक्की कुमारी को सम्मानित किया गया. मौके पर डीइओ राघवेंद्र प्रताप सिंह, अल्पसंख्यक कल्याण उपनिदेशक उपेन्द्र कुमार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी संजय झा सहित भारी संख्या में महिलाएं उपस्थित रही. मंच संचालन शिक्षिका वीनस दीक्षित ने किया.
प्रकृति और नारी दोनों ही सृजन का आधार
रविवार को आंबेडकर संवाद कक्ष में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया. कार्यक्रम की मुख्य अतिथि गोपालगंज वन प्रमंडल अधिकारी मेधा यादव ने कहा कि प्रकृति और नारी दोनों ही सृजन का आधार है. नारी का सम्मान समाज में सकारात्मकता का संचार करता है. उन्होंने बताया कि उनके गांव में लड़कियों के पढ़ने की अच्छी व्यवस्था नहीं थी. लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम के बल पर उन्होंने अपने सपने को साकार किया. मौजूदा दौर में नारी को सहानभूति की नहीं जरूरत नही है. नारी को जागरूक और आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता है.
