सीवान : कृषि विभाग के कर्मियों को अब विधि व्यवस्था के काम में से अलग रखा जायेगा. दंडाधिकारी के रूप में उनकी प्रतिनियुक्ति नहीं होगी. इस संबंध में कृषि विभाग के सचिव एन सरवन ने सभी जिलाधिकारी का पत्र लिखा है.
जिला पदाधिकारी को भेजे पत्र में सचिव ने कहा है कि कृषि विभाग में विभिन्न योजनाओं व कृषि कार्यों के प्रगति की समीक्षा के क्रम में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि कृषि समन्वयक एवं अन्य कृषि कर्मियों को कृषि कार्यों के अतिरिक्त अन्य कार्य यथा विधि व्यवस्था हेतु दंडाधिकारी के रूप में लगाये जाने से किसानों के हित में कृषि योजनाओं के ससमय क्रियान्वयन के प्रभावित हो रही है. विभिन्न जिलों में सुखाड़, बाढ़ की संभावनाओं को देखते हुए कृषि समन्वयक एवं अन्य संबंधित कृषि कर्मियों को किसान के हित संबंधी कार्यों में ही लगाये जाने का निर्णय लिया गया है.
इस संबंध में पूर्व में भी मुख्य सचिव द्वारा वर्ष 2014 में निर्देश जारी किया गया था. विदित हो कि जिलों के कृषि समन्वयकों द्वारा केंद्र प्रायोजित एवं राज्य प्रायोजित योजनाओं का कार्यान्वयन, कृषि रोड मैप के साथ ही धान रोपनी, डीजल अनुदान, बीज वितरण, मिट्टी जांच, श्री विधि, जीरो टिलेज से खेती, प्रशिक्षण, उपादान वितरण आदि विभिन्न कार्यों का ससमय संपादन किये जाने है.
निर्धारित अवधि में कृषि संबंधी कार्यों का कार्यान्वयन नहीं होने की स्थिति में कृषि की सभी योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है. ऐसे में विभाग के कृषि समन्वयकों एवं अन्य कृषि कर्मियों को विधि व्यवस्था में दंडाधिकारी कार्य से मुक्त रखने का निदेश विभाग ने दिया है.
इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार राव ने बताया कि विभाग के इस निर्णय का सभी कर्मियों ने स्वागत किया है. उन्होंने बताया कि इससे निश्चित ही विभागीय कार्यों के निबटारा में सहायता मिलेगी.
