सीतामढ़ी में 'मत भूलें अपनी माटी को' अभियान के तहत सम्मान समारोह और कवि गोष्ठी का आयोजन

सीतामढ़ी में 'मत भूलें अपनी माटी को' अभियान के तहत एक भव्य सम्मान समारोह, विचार गोष्ठी और कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में संस्कार और साहित्य के महत्व पर जोर देते हुए 11 छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया.

Sitamarhi News: कला-संगम और पं. चंद्रशेखर धर शुक्ल साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में 'मत भूलें अपनी माटी को' अभियान के तहत भूपभैरो कांटा चौक स्थित अद्भुत क्लासेज में सम्मान समारोह, विचार गोष्ठी और कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया.

कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्रामीण चिकित्सक राष्ट्रीय मंच के प्रभारी अध्यक्ष डॉ. रामा शंकर सिंह ने की, जबकि संचालन गीतकार गीतेश ने किया.

संस्कार और साहित्य के महत्व पर दिया गया जोर

मुख्य अतिथि एवं संस्थान के संरक्षक राकेश कुमार ने बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा का महत्व बताते हुए कहा कि साहित्य केवल शब्द नहीं, बल्कि संवेदना और संस्कार का माध्यम है. उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास में साहित्य की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया.

अद्भुत क्लासेज के निदेशक नीतीश कुमार ने विद्यार्थियों से मोबाइल का सीमित उपयोग करने और पढ़ाई पर अधिक ध्यान देने की अपील की.

11 छात्र-छात्राओं को मिला सम्मान

कार्यक्रम में आयोजित कविता, भाषण और निबंध प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले निशा, सुनिधि, प्रियांशु, अवध, ऋषि, कामनी, मानसी, आर्यन, ज्योति, नव्या और गरिमा सहित 11 छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया.

इस अवसर पर दिलीप कुमार, शैलेंद्र कुमार, अजित कुमार, राम शरण सिंह, रमाकांत सिंह, राम नरेश सिंह, श्याम कुमार पिंटू और डॉ. रामा शंकर सिंह ने भी अपने विचार रखे.

कविताओं ने बांधा समां

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी का शुभारंभ गीतकार गीतेश की रचना "याद रखें आप खुद की परिपाटी को, मत भूलें अपनी माटी को" से हुआ.

युवा कवि कृष्णनंदन लक्ष्य ने "हौसला के पंख से ऊंची उड़ान दो" कविता सुनाकर विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया. वहीं कुमार आशीष, कुमार नंदन और सचिन सिंह की प्रस्तुतियों ने भी श्रोताओं की खूब सराहना बटोरी.

कार्यक्रम का समापन साहित्य, संस्कृति और भारतीय मूल्यों के संरक्षण का संदेश देने के साथ हुआ.


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लेखक के बारे में

By राकेश कुमार राज

राकेश पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. राकेश क्राइम रिपोर्टिंग के अलावा सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने के लिए जाने जाते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति और दिलचस्प किस्से-कहानियों में उनकी विशेष रुचि है.

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