Sitamarhi Nagar Nigam News:सीतामढ़ी में मानसून के दस्तक देने से पहले ही जलजमाव की पुरानी समस्या ने एक बार फिर विकराल रूप ले लिया है .नगर निगम क्षेत्र की एक लाख से अधिक आबादी हर साल की तरह इस बार भी जलभराव की मार झेलने को मजबूर है .बदहाल नाले और नियमित सफाई न होने के कारण घरों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे कई मुख्य सड़कें समय से पहले ही टूटकर बर्बाद हो चुकी हैं.
104 करोड़ की योजना डेढ़ साल से ठप
शहर को जलजमाव से मुक्ति दिलाने के लिए करीब चार साल पहले 104 करोड़ रुपये की लागत से ‘वाटर ड्रेनेज सिस्टम योजना’ शुरू की गई थी .इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत बुडको (BUIDCO) द्वारा काम शुरू तो किया गया, लेकिन इसे अधूरा ही छोड़ दिया गया .नाला निर्माण के चक्कर में कई जगहों पर पुराने नालों को भी तोड़ दिया गया, जिससे जल निकासी की समस्या सुधरने के बजाय और ज्यादा गंभीर हो गई है .वार्ड पार्षद ललन प्रसाद के मुताबिक, समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई थी कि योजना के लिए सरकार द्वारा राशि जारी की जा चुकी है और बुडको ने लगभग 18 करोड़ रुपये की निकासी भी कर ली है.इसके बावजूद पिछले डेढ़ वर्षों से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है.
मोहल्लों में हाहाकार, प्रशासन बेपरवाह
वर्तमान में मानसून से पहले हुई हल्की बारिश में ही शहर के गौशाला, जानकी स्थान और कोट बाजार समेत कई पॉश और रिहायशी इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया है . अधिकांश मोहल्लों में नालियां पूरी तरह जाम और क्षतिग्रस्त हैं . इस बदहाली के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहगीरों और वाहन चालकों का सड़कों से गुजरना दूभर हो गया है .
इस बार बाढ़ जैसे हालात की आशंका
अब जब मानसून सिर पर है, तो अधूरी ड्रेनेज परियोजना ने नगर निगम और बुडको की पोल खोलकर रख दी है . स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि अगर ठप पड़े निर्माण कार्य को तुरंत चालू नहीं किया गया और युद्ध स्तर पर नालों की सफाई नहीं हुई, तो इस बार बारिश के मौसम में पूरा सीतामढ़ी शहर टापू बन जाएगा और लोगों को भारी तबाही का सामना करना पड़ेगा.
सीतामढ़ी से रतिकांत झा की रिपोर्ट
