Breastfeeding Awareness Campaign: विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के अवसर पर जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. इस बीच वर्ष 2025-26 के एचएमआईएस (HMIS) के आंकड़ों ने सीतामढ़ी की उत्साहजनक तस्वीर पेश की है. जिले में जन्म लेने वाले 97 प्रतिशत नवजातों को जन्म के पहले एक घंटे के भीतर मां का दूध पिलाया गया, जबकि अस्पताल से डिस्चार्ज होने तक 69 प्रतिशत नवजातों को केवल मां का दूध ही मिला. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि शुरुआती स्तनपान की स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन डिस्चार्ज तक हर नवजात को केवल मां का दूध उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास और तेज किए जाएंगे.
क्या है इस वर्ष की थीम
इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम "सतत जीवन की मजबूत शुरुआत के लिए स्तनपान : जो प्रभावी है, उसे और मजबूत बनाएं" रखी गई है. इसी के तहत जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नवप्रसूता माताओं को स्तनपान की सही तकनीक, उसके लाभ और छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने के महत्व की जानकारी दी जा रही है.
सीएस डॉ. रविंद्र यादव का बयान और प्रमुख प्रयास:
- सामूहिक प्रयास का नतीजा: सीएस ने कहा कि 97 प्रतिशत नवजातों को पहले घंटे में स्तनपान शुरू कराना स्वास्थ्य विभाग, आशा कार्यकर्ताओं और संस्थागत प्रसव सेवाओं की संयुक्त मेहनत का परिणाम है.
- गोल्डन ऑवर पर जोर: सरकारी अस्पतालों में प्रसव के तुरंत बाद "गोल्डन ऑवर" में स्तनपान कराने और मां-शिशु के बीच स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
- अगला लक्ष्य: अस्पताल से छुट्टी मिलने तक हर नवजात को केवल मां का दूध और छह माह तक 'एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग' सुनिश्चित करना है.
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