Sitamarhi: योगानंदेश्वर सरस्वती मठ के पीठाधीश्वर ने पुनौराधाम में की पूजा-अर्चना

कर्नाटक स्थित श्री योगानंदेश्वर सरस्वती मठ के पीठाधीश्वर स्वामी श्री श्री शंकर भारती महास्वामी शंकर ज्योति प्रकाश यात्रा के तहत पुनौराधाम पहुंचे. उन्होंने माता जानकी मंदिर और सीता कुंड में पूजा-अर्चना की तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण और आदि शंकराचार्य की परंपरा पर अपने विचार व्यक्त किए. पढ़ें पूरी खबर...

सीतामढ़ी से रतिकांत झा की रिपोर्ट

Sitamarhi News: शंकर ज्योति प्रकाश यात्रा के तहत देश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों का भ्रमण कर रहे श्री योगानंदेश्वर सरस्वती मठ, कर्नाटक के पीठाधीश्वर स्वामी श्री श्री शंकर भारती महास्वामी शनिवार को माता जानकी की पावन प्राकट्य स्थली पुनौराधाम पहुंचे. यहां उन्होंने माता जानकी मंदिर और सीता कुंड में विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती कर श्रद्धापूर्वक दर्शन किया.

पुनौराधाम मंदिर के पीठाधीश्वर महंत कौशल किशोर दास जी महाराज तथा उनके उत्तराधिकारी शिष्य राम कुमार दास ने स्वामी जी का स्वागत किया और उन्हें पुनौराधाम के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व की जानकारी दी.

सनातन संस्कृति के संरक्षण पर दिया जोर

इस अवसर पर स्वामी श्री श्री शंकर भारती महास्वामी ने कहा कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के संरक्षण तथा पुनर्स्थापन के लिए आदि शंकराचार्य ने देश की चारों दिशाओं में प्रमुख पीठों की स्थापना की थी. उन्होंने कहा कि वे देशभर में उन स्थानों का अन्वेषण कर रहे हैं, जहां आदि शंकराचार्य के चरण पड़े थे और जहां उनकी आध्यात्मिक परंपरा के चिन्ह आज भी मौजूद हैं.

केरल से शुरू हुई शंकर ज्योति प्रकाश यात्रा

स्वामी जी ने बताया कि उनकी शंकर ज्योति प्रकाश यात्रा की शुरुआत केरल से हुई थी. यात्रा के दौरान वे तमिलनाडु, गोवा, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों का भ्रमण कर चुके हैं.

इसी क्रम में वे बिहार की पावन धरती पर स्थित माता जानकी की जन्मस्थली पुनौराधाम पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि यहां भी आदि शंकराचार्य के संभावित पदचिह्नों और ऐतिहासिक साक्ष्यों का अन्वेषण किया गया, हालांकि इस संबंध में कोई ठोस जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी.

माता जानकी की झांकी भेंट कर किया सम्मान

इस दौरान सीता संत निवास के संयोजक राम शंकर शास्त्री ने स्वामी श्री श्री शंकर भारती महास्वामी को माता जानकी की उद्भव झांकी का प्रतीक चिन्ह और बाल स्वरूप की तस्वीर भेंट कर सम्मानित किया.

700 वर्ष पुरानी है मठ की परंपरा

जानकारी के अनुसार, आदि शंकराचार्य परंपरा से जुड़ा श्री योगानंदेश्वर सरस्वती मठ लगभग 700 वर्ष पूर्व कर्नाटक के कृष्णनगर (मैसूर क्षेत्र) में गोदावरी नदी के तट पर स्थापित किया गया था.

इस मठ के मुख्य संरक्षक श्रृंगेरी शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री भारतीतीर्थ महासन्निधानम् जी महाराज हैं. श्रद्धालुओं ने स्वामी श्री श्री शंकर भारती महास्वामी के पुनौराधाम आगमन को सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर बताया.

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लेखक के बारे में

Published by: Sarfaraz Ahmad

सरफराज अहमद IIMC से प्रशिक्षित पत्रकार हैं. राजनीति, समाज और हाइपरलोकल मुद्दों पर लिखते हैं. क्रिकेट और सिनेमा में गहरी रुचि रखते हैं. बीते तीन वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत हैं।

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