Ritu Jaiswal: बिहार की चर्चित महिला नेता रितु जायसवाल अब अपनी नई राजनीतिक पारी भारतीय जनता पार्टी के साथ शुरू करने की तैयारी में हैं. सूत्रों की मानें तो वह जल्द ही भाजपा की सदस्यता ले सकती हैं. कभी लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की करीबी मानी जाने वाली रितु अब नए सियासी मंच पर नजर आ सकती हैं.
रितु जायसवाल लंबे समय तक RJD में सक्रिय रहीं. पार्टी ने उन्हें महिला प्रदेश अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी दी थी. वह 2021 से 2023 तक पार्टी की प्रवक्ता भी रहीं और बिहार की राजनीति में महिला नेतृत्व का मजबूत चेहरा बनकर उभरीं. लेकिन 2025 विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से टिकट नहीं मिलने के बाद उनका पार्टी से टकराव खुलकर सामने आ गया.
टिकट कटने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरीं
परिहार विधानसभा सीट से दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहीं रितु को जब RJD ने उम्मीदवार नहीं बनाया, तो उन्होंने बगावत कर दी. निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए उन्होंने मुकाबले को पूरी तरह बदल दिया. इसका सीधा नुकसान RJD को हुआ और भाजपा उम्मीदवार को फायदा मिल गया. इसी के बाद पार्टी ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर उन्हें निष्कासित कर दिया.
RJD से बाहर होने के बाद रितु जायसवाल ने युवाओं और महिलाओं को केंद्र में रखकर नई पार्टी बनाने की बात कही थी. उन्होंने परिवारवाद और टिकट की खरीद-फरोख्त के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई थी. हालांकि अब उन्होंने नई पार्टी बनाने के बजाय भाजपा के साथ जाने का रास्ता चुना है.
पंचायत से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
48 वर्षीय रितु जायसवाल ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत सीतामढ़ी की सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया के रूप में की थी. मुखिया रहते उन्होंने गांव में विकास, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई काम किए. उनके काम को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली और उन्हें सम्मानित किया गया.
रितु ने 2020 में RJD के टिकट पर परिहार विधानसभा चुनाव लड़ा, जहां उन्हें बेहद कम अंतर से हार मिली. इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें शिवहर सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन वहां भी जीत नहीं मिली. लगातार दो चुनाव हारने के बावजूद उनकी राजनीतिक सक्रियता बनी रही.
परिवार भी समाजसेवा से जुड़ा
रितु जायसवाल के पति अरुण कुमार पूर्व IAS अधिकारी रह चुके हैं. उन्होंने नौकरी छोड़ समाजसेवा का रास्ता चुना और पटना में जरूरतमंद युवाओं को UPSC की मुफ्त तैयारी कराने लगे. रितु भी लगातार सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रही हैं.
हाल ही में शिक्षक भर्ती को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुए लाठीचार्ज को रितु जायसवाल ने गलत बताया था. उन्होंने बेरोजगारों और महिलाओं के मुद्दे पर लगातार अपनी आवाज बुलंद रखी है. यही वजह है कि बिहार की राजनीति में उनकी अलग पहचान बनी हुई है.
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BJP में एंट्री से बदल सकते हैं समीकरण
रितु जायसवाल का भाजपा में जाना सिर्फ दल बदल नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बिहार खासकर सीतामढ़ी की राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. परिहार और आसपास के इलाकों में उनकी पकड़ को देखते हुए भाजपा को इसका राजनीतिक फायदा मिल सकता है. अब सबकी नजर उनकी आधिकारिक एंट्री पर टिकी है.
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