बागमती नदी के कटाव व बाढ़ से बर्बाद हो चुके हैं जमला गांव के लोग, अब तक नहीं मिली सहायता

बागमती नदी के कटाव एवं बाढ़ से त्रस्त प्रखंड क्षेत्र के बरहरवा पंचायत के वार्ड नंबर एक जमला पुनर्वास का अस्तित्व मिटने के कगार पर पहुंच गया है.

सुप्पी. बागमती नदी के कटाव एवं बाढ़ से त्रस्त प्रखंड क्षेत्र के बरहरवा पंचायत के वार्ड नंबर एक जमला पुनर्वास का अस्तित्व मिटने के कगार पर पहुंच गया है. पीड़ित नरेश दास, उमेश महतो व अकलू दास समेत अन्य ने बताया कि विगत तीन वर्षों से लगातार कटाव के चलते आधा गांव पुनर्वासित हो चुका था. इस बार विगत पांच दिसंबर को आयी बाढ़ से गांव के करीब 90 प्रतिशत लोग बर्बाद हो चुके हैं. पानी अचानक इतनी तेजी से बढ़ा कि लोग अपने घर का सामान भी बाहर नहीं निकाल सके. गणेश राय, कृपाल राय व जोखन महतो समेत अन्य ने बताया कि रात को अचानक आयी बाढ़ ने लोगों को भगाने का मौका तक नहीं दिया. घर का सारा सामान बाढ़ के पानी में बह कर बर्बाद हो गया. राम बालक दास बच्चू दास व भगीरथ महतो ने कहा कि करीब 300 घरों के 1500 लोग विस्थापित हुए है. सभी लोग बांध पर खुद से पॉलीथिन सीट खरीदकर राउटी गिराकर किसी तरह से जीवन-बसर कर रहे हैं. संबंधित पदाधिकारियों को जब इस संबंध में कहा जाता है तो स्थल जांच कर सहायता उपलब्ध करवाने की बात कही जाती है, पर अब तक न कोई जांच हुई है और न हीं किसी प्रकार की सहायता उपलब्ध कराई गई है. आपसी सहयोग से लोग किसी तरह विपत्ति का दिन काट रहे हैं. वहीं विकास यादव ने कहा कि बाढ़ एवं कटाव की विभीषिका से गांव के लोग पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं. कोई भी अधिकारी व पदाधिकारी गांव के लोगों की समस्या सुनने को तैयार नहीं है. अगर यही स्थिति रही तो ग्रामीण सड़क पर उतर कर आंदोलन करने को बाध्य होंगे और इसकी सारी जिम्मेदारी संबंधित पदाधिकारी की होगी. — जल्द की जाएगी सहायता इस बाबत सीओ किशुनदेव राय ने कहा कि सभी पीड़ित परिवारों को यथा शीघ्र सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी. इस दिशा में प्रयास शुरू है. आपदा कोष से सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है.

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Author: VINAY PANDEY

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