Ground Water Crisis: परिहार प्रखंड क्षेत्र में जल संकट विकराल रूप ले चुका है. भूजल स्तर में भारी गिरावट और बारिश की कमी के कारण सैकड़ों चापाकल सूख गए हैं. परिहार दक्षिणी पंचायत का नोनाही गांव बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है. बिजली, तकनीकी खराबी और गिरते वाटर लेवल से जलमीनारें भी बेअसर साबित हो रही हैं.
ग्रामीण बोले: विकास के दावों के बाद भी प्यास बुझाने में नाकाम सरकार
नोनाही गांव में करीब 700 घर हैं. पिछले दो-तीन महीनों से लगभग सभी चापाकल ठप पड़े हैं.
- जवाहर यादव (ग्रामीण): "लाखों-करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सरकार प्यास बुझाने में नाकाम है. लोग बूंद-बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं."
- रंधीर कुमार (ग्रामीण): "मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना (नल-जल) में चयन के बावजूद पानी नहीं मिल रहा. हजारों की आबादी परेशान है."
- सीता देवी (ग्रामीण): "खाना बनाने और पीने तक के लिए दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है. कोई अधिकारी नहीं सुन रहा."
अधिकारियों की बेरुखी से बिगड़े हालात
ग्रामीणों ने PHED अभियंता, BDO, CO और जिलाधिकारी तक शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला.
मुखिया सपना कुमारी का बयान: "पेयजल संकट गहराने के बावजूद अधिकारी कोई पहल नहीं कर रहे हैं. इससे लोगों का दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है."
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन तुरंत टैंकरों की व्यवस्था करे और बंद पड़े नल-जल प्रोजेक्ट को चालू कराए.
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