sitamarhi news : जानकी नवमी : पुनौरा धाम में श्री रामभद्राचार्य जी की नौ दिवसीय श्री राम कथा शुरू

जानकी नवमी के अवसर पर सोमवार से पुनौरा धाम के सीता प्रेक्षा-गृह में तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरू श्री रामभद्राचार्य जी महाराज के श्रीमुख से श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ.

सीतामढ़ी. जानकी जन्मभूमि, पुनौरा धाम में हर वर्ष की तरह इस बार भी जानकी नवमी के अवसर पर सोमवार से पुनौरा धाम के सीता प्रेक्षा-गृह में तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरू श्री रामभद्राचार्य जी महाराज के श्रीमुख से श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ. कथा का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गुरु पूजन व रामायण पूजन के साथ हुआ. स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ने कहा कि उनकी सोलह वर्ष की तपस्या पूर्ण हुई है. भारत सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व बिहार सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी जानकी जन्मभूमि, पुनौराधाम को मान लिया है. 2010 से पहले तीन बार की कथा को पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने निरस्त कराने का काम किया. अब मां सीता जन्मभूमि पुनौराधाम का विकास निश्चित होगा. पहले यहां कोई सुविधा नहीं थी. अब धीरे-धीरे कुछ हुआ है. कहा कि संसार के संबंध अनुबंध है. परमात्मा से संबंध ही संबंध है. संस्कारिक संबंध छोड़कर परमात्मा से कोई संबंध बना लीजिये. मां सीता के ही पति सिर्फ राम हैं, इसलिए कोई पति संबंध नहीं बना लेना. भगवान से संबंध बनते ही भगवान पास आने लगते है. भगवान अंतर्यामी रूप में वास करते हैं. मां सीता की अष्टसखी चारशिला, लक्ष्मणा, हेमा, क्षेमा, पद्मगंधा, वरारोहा, सुलोचना व सुभगा हैं. पुनौरा में ही सीता जी का प्राकट्य हुआ है. बाल्मीकि जी और हनुमान जी यहां रहते हैं. यह पुण्यारण्य है. अब गृह मंत्री ने कहा है कि श्री राम जन्मभूमि की तरह माता सीता जन्मभूमि पुनौराधाम का विकास होगा. यहीं माता सीता प्राकट्य भूमि है. श्री हलेश्वर नाथ महादेव में हलेष्टि यज्ञ किया. चार बैल एक हम एक सुनैना बैल की भूमिका निभाएंंगे. हल की नोक से सोने के सिंहासन पर बैठकर मां सीता प्रकट हुईं. यही पुण्यारण्य का पुनौरा माता सीता प्राकट्य भूमि है. भूमिजा है मां सीता. अब निश्चित ही माता सीता प्राकट्य भूमि का विकास होगा. कथा में मुख्य यजमान जानकी नंदन पांडेय, संयोजक राम शंकर शास्त्री, अवधेश शास्त्री, धनुषधारी सिंह, बाल्मीकि कुमार, रघुनाथ तिवारी, विधायक मिथिलेश कुमार, शंकर कुमार, जानकी जन्मभूमि पुनौराधाम के न्यास ने सहयोग प्रदान किये. इससे पूर्व श्री रामभद्राचार्य जी महाराज के पधारने पर यहां भव्य स्वागत किया गया. उन्होंने जानकी मंदिर के दर्शन के बाद अल्प विश्राम के बाद कथा प्रारंभ किया.

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Author: VINAY PANDEY

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