चोरौत कचरा प्रबंधन: प्लास्टिक और अन्य सूखे कचरे के वैज्ञानिक व व्यवस्थित प्रबंधन के लिए चोरौत प्रखंड में प्रशासनिक पहल तेज हो गई है. प्रखंड मुख्यालय स्थित अडैला चौड़ में एनएच 227 के किनारे मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर की स्थापना के लिए जमीन चिह्नित की गई है. इसी कड़ी में शनिवार को वरीय अधिकारियों की संयुक्त टीम ने प्रस्तावित स्थल का सघन निरीक्षण किया और उपलब्ध भूमि, संपर्क पथ व तकनीकी आवश्यकताओं का जायजा लिया.
तकनीकी जांच व एनओसी के बाद शुरू होगा निर्माण
डीआरडीए निदेशक सह प्रखंड नोडल पदाधिकारी शशिकांत शर्मा ने बताया कि चिह्नित स्थल की उपयुक्तता जांचने के लिए तकनीकी टीम जल्द विस्तृत प्रतिवेदन सौंपेगी. आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त होने के उपरांत स्थल का अंतिम चयन कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाएगा.
एमआरएफ सेंटर से होने वाले मुख्य लाभ:
- कचरा प्रबंधन: पंचायतों व ग्रामीण इलाकों से एकत्रित सूखे और प्लास्टिक कचरे की एक जगह छंटाई व रीसाइक्लिंग होगी.
- पर्यावरण संरक्षण: खुले में कचरा फेंकने और प्लास्टिक जलाने की आदत पर रोक लगेगी, जिससे मिट्टी, जल और वायु प्रदूषण में कमी आएगी.
- रोजगार सृजन: कचरा संग्रहण, परिवहन, छंटाई और प्रसंस्करण से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे.
- संसाधन निर्माण: कचरे का सही उपयोग कर उसे उपयोगी उत्पाद और आर्थिक संसाधन में बदला जा सकेगा.
निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक टीम रही मौजूद
स्थल निरीक्षण के मौके पर डीआरडीए निदेशक शशिकांत शर्मा, बीडीओ अमित कुमार अमन, सीओ सुबोध कुमार, पीओ सरफराज अहमद, प्रमुख प्रतिनिधि सुनील राउत, पूर्व जिला पार्षद विश्वनाथ मिश्र, मुखिया प्रतिनिधि मुकेश सिंह और पंसस हनुमान शरण राय सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि व कर्मी उपस्थित थे.
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