सीतामढ़ी ROB निर्माण के लिए सरकार ने जारी किए 110.42 करोड़, जल्द पूरा होगा काम

सीतामढ़ी की बहुप्रतीक्षित मेहसौल रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) परियोजना को आखिरकार प्रशासनिक स्वीकृति मिल गई है. 110.42 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से शहर की यातायात समस्या का समाधान होगा. जानिए कब तक पूरा होगा काम और जाम से कब मिलेगी मुक्ति.

Sitamarhi ROB project: बिहार सरकार ने सीतामढ़ी शहर की सबसे गंभीर और पुरानी यातायात समस्याओं में शुमार मेहसौल रेलवे ओवरब्रिज निर्माण परियोजना को बड़ी राहत दी है. सरकार ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए प्रथम पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है. परसौनी और सीतामढ़ी रेलवे स्टेशनों के बीच स्थित व्यस्त लेवल क्रॉसिंग संख्या-56 के स्थान पर बनने वाले इस आरओबी और उसके पहुंच-पथ के निर्माण की कुल लागत अब 110.42 करोड़ रुपये तय की गई है. इस नई स्वीकृति से लंबे समय से धन के अभाव और लागत में बढ़ोतरी के कारण प्रभावित चल रही इस परियोजना को आखिरकार नई गति मिलने की पूरी उम्मीद जगी है.

Sitamarhi News: राज्यांश के रूप में 100.49 करोड़ और रेलवे देगा 9.92 करोड़

पथ निर्माण विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, इस विशाल परियोजना में राज्य सरकार की कुल हिस्सेदारी 100.49 करोड़ रुपये होगी, जबकि रेलवे की ओर से 9.92 करोड़ रुपये का अंशदान दिया जाएगा. इस पूरे निर्माण कार्य की जिम्मेदारी बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड को सौंपी गई है, जिसके माध्यम से गुणवत्तापूर्ण कार्य कराया जाएगा. विभागीय सचिव पंकज कुमार पाल के हस्ताक्षर से यह स्वीकृति आदेश विधिवत जारी किया गया है.

डेढ़ दशक से अधूरा है शहर का सबसे महत्वपूर्ण पुल

मेहसौल आरओबी सीतामढ़ी की सबसे बहुप्रतीक्षित और महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है. इस परियोजना की शुरुआत करीब डेढ़ दशक पहले हुई थी, लेकिन प्रशासनिक अड़चनों, भूमि अधिग्रहण और अन्य कारणों से निर्माण कार्य लगातार प्रभावित होता रहा है. वर्ष 2022 में तीसरी बार इस पुल का निर्माण कार्य नए सिरे से शुरू किया गया था और इसे लगभग डेढ़ वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. हालांकि, तय सीमा बीत जाने के बावजूद पुल का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है, जिससे स्थानीय नागरिकों में निराशा का माहौल था.

traffic jam relief Sitamarhi: बढ़ती लागत और जाम से मिलेगी मुक्ति

लंबे समय से चल रहे विलंब के कारण परियोजना की लागत में भारी वृद्धि हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स में लगातार बजट बढ़ने और राशि की कमी को कार्य में रुकावट का बड़ा कारण बताया गया था. पहले वर्ष 2024 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य था, जो बाद में आगे बढ़कर अप्रैल 2026 तक पहुंच गया. इस आरओबी के बन जाने से शहर के व्यस्ततम समपार फाटक पर लगने वाले भीषण जाम से लोगों को स्थायी राहत मिलेगी और दुर्घटनाओं की आशंका भी काफी हद तक कम हो जाएगी.

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By अमिताभ कुमार

अमिताभ पिछले 17 वर्षों से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक दोनों माध्यमों में सक्रिय रहे हैं. एक खोजी पत्रकार के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है. भ्रष्टाचार, अपराध एवं जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है. वे हमेशा सामाजिक सरोकारों और आम लोगों की समस्याओं को निष्पक्ष, निर्भीक और जनपक्षधर तरीके से उठाने के लिए जाने जाते हैं.

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