सीतामढ़ी में तीन साल पुराने मर्डर केस में बड़ा फैसला, कोर्ट ने चार दोषियों को सुनाई उम्रकैद

सीतामढ़ी में तीन साल पुराने बहुचर्चित हत्याकांड में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. चार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. गवाहों के मुकरने के बावजूद मजबूत वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह फैसला आया है.

Sitamarhi Court Murder Verdict: सीतामढ़ी के तीन वर्ष पुराने चर्चित हत्याकांड में न्यायालय ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे)-1 सह विशेष न्यायाधीश राजीव कुमार ने गुरुवार को भादवि की धारा 302 के तहत चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है. अर्थदंड नहीं देने पर दोषियों को छह माह अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी. सजा पाने वालों में नगर थाना क्षेत्र के जानकी स्थान पुरानी मठ वार्ड नंबर 8 निवासी सुनील कुमार, रामाशंकर कुमार, संतोष महतो तथा रोहित कुमार शामिल हैं.

Sitamarhi News: विभिन्न धाराओं में भी मुकर्रर हुई कड़ी सजा

अदालत ने हत्या के साथ-साथ साक्ष्य छिपाने की धारा 201 के तहत सभी दोषियों को छह वर्ष का कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया है. इसके अलावा एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दोषियों को 10 वर्ष की जेल और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई. फैसले के अनुसार सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और जेल में बिताई गई अवधि को इसमें समायोजित किया जाएगा. अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक शोभा कुमारी और बचाव पक्ष से अधिवक्ता मधुशंकर सिंह ने जिरह की थी.

शादी के बहाने बुलाकर कर दी थी नृशंस हत्या

घटना 13 मार्च 2023 की है, जब अभियुक्तों ने पिंटू राउत को एक शादी समारोह में चलने का झांसा देकर घर से बुलाया था. जब पिंटू वापस नहीं लौटा, तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की लेकिन आरोपी अपने घरों से फरार थे. 15 मार्च 2023 को पुनौरा मंदिर के पश्चिमी पोखर में जलकुंभी के बीच से पिंटू का शव मिला. उसके चेहरे और शरीर पर चाकू से वार के गहरे जख्म थे. मृतक की पत्नी ने पुनौरा थाने में कांड संख्या 73/23 के तहत नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

गवाह मुकरे और सुलह हुई, फिर भी साबित हुआ जुर्म

इस मुकदमे का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि सूचिका सहित कुल 9 प्रमुख गवाह अदालत में अपने बयानों से मुकर गए और उन्हें पक्षद्रोही घोषित किया गया. सूचिका ने आरोपियों के साथ सुलह भी कर ली थी. इसके बावजूद अनुसंधानकर्ता पुअनि मनोज राम द्वारा घटनास्थल से बरामद ब्रेसलेट, कलाई के बटन, डिजिटल घड़ी और तकनीकी साक्ष्यों को अदालत में मजबूती से पेश किया गया. इन अकाट्य वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर अदालत ने चारों को हत्या का दोषी करार देकर सलाखों के पीछे भेज दिया.

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By राकेश कुमार राज

राकेश पिछले 23 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वे प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. राकेश क्राइम रिपोर्टिंग के अलावा सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने के लिए जाने जाते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति और दिलचस्प किस्से-कहानियों में उनकी विशेष रुचि है.

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